तीन गांव के लोग चार दशक से चला रहे सतना की खोआ मंडी, 3 बार जगह बदली, अब यहां सज रहा बाजार

तीन गांव के लोग चार दशक से चला रहे सतना की खोआ मंडी, 3 बार जगह बदली, अब यहां सज रहा बाजार


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Satna Khao Mandi: सतना का खोवा मार्केट अस्पताल चौक पर 4 साल से स्थायी रूप से सजता है, मानिकपुर, मारकुंडी और करवी के व्यापारी शुद्ध खोवा बेचते हैं, जो शहर की मिठाइयों का असली स्वाद तय करता है.

Satna News: सतना में अस्पताल चौक के पास रोज सुबह सजने वाला खोवा मार्केट सिर्फ एक अस्थायी बाजार नहीं, बल्कि शहर की रसोई, परंपरा और त्योहारों की खुशबू को जिंदा रखने वाला केंद्र है. यहां एक टोकरी में सजी खोवा की ढेरियां न केवल बेहतरीन क्वालिटी का भरोसा देती हैं, बल्कि बड़े-बड़े दुकानों से भी कम दाम पर शुद्ध खोवा उपलब्ध कराती हैं. यही वजह है कि सतना की मिठाइयों का असली स्वाद उसी खोवा से तय होता है, जो इसी सड़क किनारे सजने वाली दुकानों से शहर भर में पहुंचता है.

खोवा मंडी का ऐसा सफर
सतना का प्रसिद्ध खोवा मार्केट 4 साल से अस्पताल चौक के पास स्थायी रूप से सज रहा है लेकिन इसका इतिहास इससे कहीं लंबा है. यह मंडी पहले काका स्वीट्स के सामने रुई मंडी के पास लगभग 25 वर्षों तक लगती थी. इसके बाद यह लक्ष्मी बाई स्कूल के बगल में शिफ्ट हुई और फिर नगर निगम कमिश्नर के निर्देश पर मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दी गई. स्थानीय लोगों के लिए यह बाजार सिर्फ़ खरीद का ठिकाना नहीं बल्कि वर्षों की यादों वाला एक अहम हिस्सा है.

एक टोकरी की दुकान, पर सदियों की पहचान
इस मंडी की सबसे अनोखी बात है कि यहां दुकानें बोरी, चटाई या तिरपाल पर ही सजती हैं. सुबह 6 से 7 बजे के बीच व्यापारी अपनी छोटी सी दुकान जमाते हैं और शाम तक हलचल बनी रहती है. सिर्फ़ एक टोकरी में रखा खोवा ही इनकी पूरी दुकान है और इस सादगी की वजह से ही ग्राहकों को दाम सबसे कम मिलता है. यहां गाय-भैंस के दूध से बने दोनों खोवा मिलते है और खास बात ये है कि इसकी शुद्धता पर आज तक किसी भी ग्राहक ने उंगली नहीं उठाई.

सिर्फ तीन गांव के व्यापारी चलाते पूरी मंडी
इस खोवा मार्केट से जुड़ी एक और अहम बात यह भी है कि यहां के सारे व्यापारी सिर्फ़ तीन गांवों जैसे मानिकपुर, मारकुंडी और करवी से आते हैं. वर्षों से एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ इस कारोबार में जुड़ी हैं. लोकल 18 से बातचीत में मानिकपुर के व्यापारी ने बताया कि पहले यहां 25–30 दुकानदार होते थे लेकिन अब संख्या घटकर 10–15 रह गई है. फिर भी गुणवत्ता और भरोसा आज भी वैसा ही कायम है.

40 साल पुराने अनुभव की मिठास
बीते 40 सालों से खोवा बेच रहे मारकुंडी से आए एक बुजुर्ग व्यापारी बताते हैं कि उन्होंने शहर की खोवा मंडी को कई बार बदलते देखा मगर ग्राहकों का यहाँ से विश्वास कभी नहीं टूटा. उनकी दुकान अब चार साल से अस्पताल चौक के पास लग रही है और ग्राहकों का उत्साह आज भी पहले जैसा ही है.

स्थानीय निवासी सुनील कुमार प्रजापति बताते हैं कि उनकी उम्र 50 साल है और वे बचपन से इन्हीं व्यापारियों से खोवा लेते आ रहे हैं. मंडी भले कहीं भी शिफ्ट हुई हो लेकिन उनका भरोसा कभी नहीं डगमगाया. सुनील कहते हैं कि यहाँ का खोवा किसी भी स्वीट डिश को ए-वन क्वालिटी का टेस्ट देता है. यही वजह है कि शादी, भंडारे, त्योहारों आदि का असली स्वाद इसी मंडी से होकर गुजरता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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