रेस्टोरेंट के इंतजार में रीवा के गिद्ध, 25 लाख के खर्च से शुरू होगा संचालन

रेस्टोरेंट के इंतजार में रीवा के गिद्ध, 25 लाख के खर्च से शुरू होगा संचालन


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Rewa news: वर्तमान में प्रदेश में लगभग 10 हजार के आसपास ही गिद्ध बचे हैं, जिन्हें बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है. गिद्धों के संरक्षण के लिए वलचर सेंटर बनाए जाने के प्रस्ताव के बाद भी साल भर बीत गए पर विंध्य के गिद्धों को अपने रेस्टोरेंट का इंतजार है.

रीवाः मध्यप्रदेश के रीवा जिले के क्योटी वॉटरफॉल के पास गिद्धों के लिए रेस्टोरेंट खोलने की तैयारी बिगत वर्ष की गई थी. यह रेस्टोरेंट गिद्धों के संरक्षण के लिए खोला जाना था. वन मंडल रीवा इसके लिए काफी तेजी से काम कर रहा था. तत्कालीन वनमंडल अधिकारी अनुपम शर्मा द्वारा पूरा खाका तैयार कर लिया गया था कि कैसे रेस्टोरेंट को तैयार किया जाना है. पूरा मसौदा तैयार कर मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था, पर साल भर बीत जाने के बाद भी गिद्धों का यह रेस्टोरेंट तैयार नहीं हो पाया है.

अब ऐसा माना जा रहा है कि अप्रैल 2026 तक यह रेस्टोरेंट तैयार हो जाएगा. खास बात यह है कि यह अद्भुत रेस्टोरेंट रीवा शहर के बेहद खूबसूरत इलाके में खोला जा रहा है. वल्चर सेंटर बनाए जाने का कार्य वाइल्ड लाइफ से अनुमति मिलने के बाद अप्रैल में शुरू कर दिया जाएगा.

इतने रुपये आएंगे खर्च

रीवा वन परिक्षेत्र में पदस्थ राहुल देव मिश्रा ने बताया कि जिले के सिरमौर क्षेत्र अंतर्गत क्योटी झरने के आसपास वल्चर रेस्टोरेंट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. प्रस्ताव को पूर्व में ही वन मुख्यालय भेजा गया था. प्रस्ताव को वाइल्ड लाइफ सेंटर भी भेजा जाना है. स्वीकृति मिलने के बाद अप्रैल महीने में इसे शुरू किए जाने की संभावना है. वल्चर रेस्टोरेंट शुरू करने में 10 से 15 लाख रुपये की राशि खर्च होगी. माना जा रहा है कि 20 से 25 लाख रुपये प्रति माह के खर्च में वल्चर रेस्टोरेंट का संचालन शुरू किया जा सकेगा.

गिद्धों के संख्या को देखते हुए लिया गया निर्णय

दरअसल, ये सभी प्रयास गिद्धों की संख्या में अचानक से हो रही कमी को देखते हुए किए जा रहे हैं. यही वजह है कि गिद्धों के जीवन को बचाने के लिए वन विभाग ने वल्चर साइट के निर्माण का फैसला किया है. इसमें प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वातावरण वाले स्थान में क्योटी झरने के एक विशेष क्षेत्र को चिन्हित कर यहां वल्चर रेस्टोरेंट बनाने का फैसला लिया गया है. वर्तमान में प्रदेश में लगभग 10 हजार के आसपास ही गिद्ध बचे हैं, जिन्हें बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है. गिद्धों के संरक्षण के लिए वलचर सेंटर बनाए जाने के प्रस्ताव के बाद भी साल भर बीत गए पर विंध्य के गिद्धों को अपने रेस्टोरेंट का इंतजार है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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