Dairy Tips: मध्य प्रदेश में बढ़ती ठंड का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुधारू पशुओं पर भी साफ नजर आने लगा है. सर्दी बढ़ते ही दुधारू जानवरों के दूध उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. हालांकि, अगर सही खान-पान और सर्दी से बचाव के उपाय समय रहते अपनाए जाएं, तो दूध की इस कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है.
सीधी जिला पशु चिकित्सालय के डॉक्टर सलिल कुमार पाठक ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि ठंड में दुधारू पशुओं का शरीर ज्यादा ऊर्जा गर्मी बनाने में खर्च करता है. यदि उन्हें पोषक तत्वों से भरपूर आहार न मिले, तो दूध उत्पादन काम होना तय है. कई पशुपालक इस मौसम में केवल सूखा चारा या एक जैसा भोजन देते रहते हैं, जिससे कैल्शियम और प्रोटीन की कमी हो जाती है और दूध कम हो जाता है.
डॉ. पाठक के अनुसार, सर्दियों में पशुओं को गुड़, सरसों का तेल और अलसी के केक का मिश्रण देना फायदेमंद होता है. इससे शरीर में गर्मी बनी रहती है और ऊर्जा भी मिलती है. साथ ही कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर नियमित रूप से देना चाहिए. हरे चारे के रूप में बरसीम को चार-पांच घंटे सुखाकर खिलाना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है.
ठंड के लिए देसी नुस्खे कारगर
वहीं, पशुपालक संतोष कुमार मिश्रा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गांव देहात में ठंड के लिए देसी नुस्खे बेहद कारगर हैं. बड़ी भूनकर खिलाने से ठंड से बचाव होता है. सरसों का तेल, गुड़, हल्दी, मेथी, सोंठ और अदरक को पकाकर सप्ताह में एक बार देने से दूध बढ़ता है और दुधारू पशु स्वस्थ रहते हैं. संतोष मिश्रा ने बताया कि अगर पशु 10 किलो दूध देता है, तो उसे पर्याप्त दाना-भूसा देना जरूरी है, सिर्फ भूसा खिलाने से दूध नहीं मिलेगा. आहार में चुनी, खली और सुदाना भी शामिल होना चाहिए.
पशुपालकों के मुताबिक, सर्दियों में सबसे ज्यादा खतरा गाय-भैंसों के बच्चों को होता है, जिन्हें निमोनिया और संक्रमण का खतरा रहता है. इसलिए बाड़े में गर्मी बनाए रखना जरूरी है. जूट के बोरे से देसी स्वेटर बनाकर पहनाना, सुबह धूप दिखाना, नियमित डी-वॉर्मिंग कराना और जमीन पर धान की पराली बिछाना काफी फायदेमंद साबित होता है. इस तरह सही खान-पान, देसी उपाय और उचित देखभाल अपनाकर सर्दियों में भी दूध उत्पादन बनाए रखा जा सकता है.