खंडवा: जिला अस्पताल के ऑटो और एंबुलेंस चालकों की ऐसी कहानी जो अपनी छोटी कमाई में से बड़ा दिल दिखाकर भूखों के पेट भरने की शुरुआत की.
इन चालकों का कहना है भूख क्या होती है, यह वही जानता है जिसने खुद कभी भूखी रात काटी हो. इसी एहसास ने हमें दूसरों की मदद करने की हिम्मत दी. दरअसल, अस्पताल में उपचार कराने आए मरीजों के साथ उनके परिजन भी रहते हैं.
कई बार इलाज में पूरी रात गुजर जाती है और आसपास खाना मिलने का कोई ठिकाना नहीं. मजबूरी में कई लोग भूखे ही सो जाते हैं. यह दर्द जब इन ऑटो-एंबुलेंस चालकों ने देखा तो उन्होंने ठान लिया कि कोई भी परिजन रात को भूखा नहीं सोएगा. यहीं से शुरू हुआ इनका निःशुल्क भोजन वितरण अभियान.
शाम को होती है खाने की व्यवस्था
गुरुवार की शाम को ठीक 7 बजे, ऑटो-एंबुलेंस चालक और अस्पताल के स्थानीय गार्ड मिलकर अपनी कमाई का एक हिस्सा निकालते हैं. इस पैसे से रोटी-सब्जी, पुलाव या खिचड़ी बनती है. खाना बनवाने के लिए ये लोग लायंस भोजनालय के किचन में खुद पहुंचते हैं और बड़े प्यार से भोजन पकाते हैं. इस टोली में मोहसिन, मोहम्मद नदीम, लोकेंद्र चौहान, कल्लू गवली, जितेंद्र चौहान, अरबाज पठान, विशाल दशोरे, राहुल, सुभाष, अतुल नागर, सलीम शाह और कई अन्य साथी शामिल हैं. इन सबकी एक ही सोच है किसी की भूख मिट जाए, बस यही सबसे बड़ी कमाई है.
भोजन तैयार होने की वार्डों में जाकर देते हैं सूचना
भोजन बनने के बाद टीम के सदस्य अस्पताल के हर वार्ड में जाकर मरीजों के परिजनों और स्टाफ को बताते हैं कि नीचे भोजन उपलब्ध है. हर गुरुवार यह सिलसिला चलता है और करीब 250 से 300 लोग सम्मान के साथ खाना ग्रहण करते हैं. टीम बताती है कि उनकी दैनिक कमाई 400 से 500 रुपये के बीच होती है. खर्च निकालने के बाद जो बचता है, उसमें से हर कोई अपना हिस्सा जोड़ देता है.
Local 18 से बात करते हुए एंबुलेंस चालक मोहसिन और अतुल नागर ने कहा हम सब मिलकर पैसे इकट्ठे करते हैं. शुरुआत 200 रुपये से हुई थी. हमारी इच्छा है कि इसे गुरुवार तक सीमित न रखें, बल्कि रोज़ करें. इस पहल से कोई जुड़ना चाहता है तो वह संपर्क कर सकते हैं.
खाना खुद बनाते हैं सदस्य
इस ग्रुप की सबसे खास बात यह है कि ये लोग सिर्फ पैसे ही नहीं देते, बल्कि खाना खुद बनाते हैं. सब मिलकर किचन में खड़े होते हैं और अपने हाथों से भोजन तैयार करते हैं. यही वजह है कि खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि प्यार मिला होता है. अस्पताल में आने वाले लोग भी इस पहल की खूब सराहना कर रहे हैं. कई लोग कहते हैं कि जहां चारों तरफ स्वार्थ दिखता है, वहीं यह ग्रुप इंसानियत का सच्चा चेहरा दिखाता है.