बुरहानपुर की मां इच्छादेवी, मजदूर को सपने में दिखी थी माता की प्रतिमा, संतान और विवाह की मन्नत होती है पूरी

बुरहानपुर की मां इच्छादेवी, मजदूर को सपने में दिखी थी माता की प्रतिमा, संतान और विवाह की मन्नत होती है पूरी


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Maa Ichhadevi of Burhanpur: लोकल 18 की टीम ने जब मंदिर समिति के दिनेश चौधरी से बात की तो उन्होंने बताया कि एक मजदूर के सपने में माता ने दर्शन दिए और कहा कि वह पहाड़ पर विराजित हैं. मजदूर ने नींद से उठकर देखा तो यह सपना था. वह उस स्थान पर पहुंच गया जहां पत्थर और झाड़ियां थीं. जब उसने उन्हें हटाया तो माता स्वयं प्रकट हुईं.

Maa Ichhadevi temple: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कई प्राचीन मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे मौजूद है. जिनकी अपनी-अपनी कहानी है. बुरहानपुर जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मां इच्छादेवी का एक प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर लगभग 400 से 500 साल पुराना बताया जाता है. ग्रामीणों ने इस मंदिर का नाम इच्छा देवी माता मंदिर रखा. यहां भक्त संतान, विवाह और व्यापार के लिए मन्नत मांगने आते हैं. हर वर्ष लाखों की संख्या में भक्त दर्शन और पूजन करने आते है. यह मंदिर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर स्थित है, जिससे तीन राज्यों के भक्त यहां आते हैं.

लोकल 18 की टीम ने जब मंदिर समिति के दिनेश चौधरी से बात की तो उन्होंने बताया कि एक मजदूर के सपने में माता ने दर्शन दिए और कहा कि वह पहाड़ पर विराजित हैं. मजदूर ने नींद से उठकर देखा तो यह सपना था. वह उस स्थान पर पहुंच गया जहां पत्थर और झाड़ियां थीं. जब उसने उन्हें हटाया तो माता स्वयं प्रकट हुईं. यह देखकर मजदूर हैरान हो गया और उसने पूरी कहानी ग्रामीणों को बताई. इसके बाद ग्रामीण भी दर्शन करने गए. आज मंदिर ने विशाल रूप ले लिया है और यहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मेले का आयोजन होता है.

संतान विवाह के लिए मांगी जाती है मन्नत
इस मंदिर की खासियत है कि यहां सबसे अधिक भक्त परिवार में संतान और बच्चों के विवाह के लिए मन्नत मांगते हैं. जब मन्नत पूरी होती है तो माता को चुनरी और नीम की साड़ी चढ़ाई जाती है. इस दिन मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के भक्त भी नीम साड़ी चढ़ाने के लिए आते है और अपनी मन्नतें उतारते है. इसके बाद प्रसादी का आयोजन भी होता है. यह मंदिर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर स्थित है.

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बुरहानपुर की मां इच्छादेवी, मजदूर को सपने में दिखी थी माता की प्रतिमा



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