आशीष पांडेय, शिवपुरी: शिवपुरी जिले में सरसों किसानों की सबसे भरोसेमंद और मुनाफे वाली फसलों में गिनी जाती है. यहां के किसान इसे प्यार से “सोना” कहते हैं, क्योंकि कम लागत में तैयार होने वाली यह फसल बाजार में अच्छे दाम दिला देती है. लेकिन अनुभवी किसानों की मानें तो सरसों की खेती में जरा-सी चूक पूरे मुनाफे पर पानी फेर सकती है.
किसानों का साफ कहना है कि सरसों की फसल की किस्म चाहे कोई भी हो, अगर सही समय पर सिंचाई नहीं की गई तो पैदावार गिरना तय है. शिवपुरी के किसान चरण सिंह प्रजापति बताते हैं कि समय पर पानी मिलने से ही पौधा मजबूत होता है, फूल और फलियां सही बनती हैं और दाने अच्छे भरते हैं. पानी में देरी या लापरवाही सीधे-सीधे उत्पादन को नुकसान पहुंचाती है.
इन दिनों जिले में DMS Gold और काला सोना जैसी उन्नत किस्मों की खेती ज्यादा हो रही है. ये किस्में कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने के लिए जानी जाती हैं और इनमें तेल की मात्रा भी ज्यादा होती है. लेकिन किसान बताते हैं कि इन उन्नत किस्मों में भी अगर पानी का समय बिगड़ा, तो फायदा आधा रह जाता है.
कृषि विभाग और अनुभवी किसानों के अनुसार, सरसों की फसल आमतौर पर तीन सिंचाई में पूरी तरह तैयार हो जाती है. कुछ किसान चार पानी भी देते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में तीन सिंचाई पर्याप्त मानी जाती है.
पहली सिंचाई:
बुवाई के 20 से 30 दिन बाद, जब पौधे में 3 से 4 पत्तियां निकल आएं. यह पानी फसल की बढ़वार के लिए सबसे अहम होता है. अगर इस समय पानी नहीं मिला, तो पौधा कमजोर रह जाता है.
दूसरी सिंचाई:
बुवाई के 40 से 45 दिन बाद, यानी फूल आने के समय. इस दौर में नमी की कमी हुई तो फूल झड़ने लगते हैं और सीधा असर पैदावार पर पड़ता है.
तीसरी (अंतिम) सिंचाई:
करीब 70 से 80 दिन बाद, जब फसल में फलियां बन रही हों. इस पानी से दाने अच्छे से भरते हैं, वजन बढ़ता है और किसान को बेहतर उत्पादन मिलता है.
ज्यादा पानी भी बन सकता है दुश्मन
किसानों को यह भी याद रखना चाहिए कि सरसों की फसल ज्यादा पानी बिल्कुल सहन नहीं करती. खेत में पानी भर गया तो जड़ सड़ने का खतरा रहता है और फसल खराब हो सकती है.
हल्की मिट्टी वाले खेतों में थोड़ा जल्दी-जल्दी हल्का पानी देना ठीक रहता है, जबकि भारी मिट्टी में सिंचाई थोड़ी देर से भी की जा सकती है. कुल मिलाकर, अगर किसान भाइयों ने सरसों की फसल में सही समय पर और सही मात्रा में पानी दे दिया, तो यह फसल सच में “सोना” बन जाती है. लेकिन जरा-सी लापरवाही पूरे सीजन की कमाई डुबो सकती है.