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Indore news: 7 महीने से यहां पर दुकान लगा रहे हैं लेकिन इक्का-दुक्का ग्राहक ही यहां पर आते हैं. मोमोज नूडल्स चाइनीस पानी पुरी कुनाफा समेत यहां पर करीब 40 दुकानें लगाई जा रही हैं. सभी का यही हाल है.
इंदौरः स्वाद के चटकारों का 40 साल पुराना ठिकाना मेघदूत चौपाटी जब नगर निगम द्वारा हटाया जा रहा था तो यहां स्टॉल चलाने वालों के सामने रोजी रोटी का संकट था जो अभी बरकरार है. देर रात किसी मेले की तरह सजने वाली चाट चौपाटी अब वीरान हो चुकी है. निगम द्वारा कुछ हॉकर्स को बंगाली चौराहे पर जगह दी गई है जहां वह पिछले 7 महीने से वो अपने स्टाल लगा रहे हैं. दुकानदारों की मुसीबत यह है कि इस नई मेघदूत चौपाटी पर उन्हें जगह तो मिल गई है लेकिन यहां व्यापार नहीं है.
नहीं मिल रहे ग्राहक
बंगाली चौराहे पर लग रही चौपाटी पर पिज़्ज़ा और सैंडविच बेचने वाले अंबिका कुशवाहा ने हमें बताया कि वह करीब 7 महीने से यहां पर दुकान लगा रहे हैं लेकिन इक्का-दुक्का ग्राहक ही यहां पर आते हैं. मोमोज नूडल्स चाइनीस पानी पुरी कुनाफा समेत यहां पर करीब 40 दुकानें लगाई जा रही हैं. सभी का यही हाल है. वह लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी जगह का प्रचार कर रहे हैं जिसका थोड़ा बहुत असर देखने को मिल रहा है. धीरे धीरे यहां पर व्यापार भी बढ़ने लगा है. हालांकि मेघदूत चौपाटी जैसे व्यापार क्यों नहीं यहां उम्मीद नहीं है. लेकिन इस बात का भरोसा जरूर है कि जिस तरह से मेघदूत से उन्हें हटाया गया था यहां से नहीं हटाया जाएगा.
कमाई करना हो गया है मुश्किल
यहीं पर चाइनीज़ की दुकान लगाने वाले एक हॉकर ने हमें बताया कि जहां मेघदूत चौपाटी पर वह 1 दिन में करीब 5 से 6 हज़ार रुपए का व्यापार कर लेते थे लेकिन यहां पर हज़ार रुपए का व्यापार भी बमुश्किल ही हो पाता है. मेघदूत चौपाटी पूरी तरह से हट चुकी है और अब उनके पास कोई विकल्प ही नहीं बचा है. उनके कुछ साथियों को पीपलीहाना स्कीम नंबर 78 और 54 में भी जगह मिली है. हालांकि यह नगर निगम द्वारा नहीं दी गई है जिसकी वजह से लोगों को खुद किराए पर दुकान लेकर चलाना पड़ रहा है.
क्यों हटी थी मेघदूत चौपाटी
मेघदूत गार्डन के पास पिछले 40 साल से करीब 300 छोटे-छोटे दुकानदार फूड स्टॉल्स लगते थे जिससे यह चौपाटी का रूप ले चुका था. खाने पीने की शक्तियों के लिए सराफा के बाद यह सबसे पसंदीदा जगह थी जहां वह रात को कभी भी आकर मसालेदार, चाइनीस और इंदौरी स्नेक्स का आनंद उठा सकते थे. लेकिन नगर निगम द्वारा मेट्रो स्टेशन के निर्माण और फिर यूरेशियन ग्रुप की बैठक का हवाला देते हुए इसे खाली करा दिया गया. दुकानदारों ने इसके लिए कई प्रदर्शन भी किया लेकिन आखिरकार सभी को यहां से हटना पड़ा था.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें