खंडवाः खंडवा शहर के बीचों-बीच सराफा बाजार में एक ऐसा प्राचीन स्थल है, जिसकी पहचान आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले रही होगी. यह है चिंतामण गणेश मंदिर लगभग 900 साल पुराना, मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी धरोहरों में शामिल यह मंदिर अपनी रहस्यमयी और अद्भुत स्वयंभू प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहां आने वाला भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, क्योंकि यहां गणेश जी की प्रतिमा 85 डिग्री झुकी हुई अवस्था में मौजूद है, जिसका दर्शन मात्र कई मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना जाता है.
स्वयंभू और अद्भुत प्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में विराजित गणेश जी की प्रतिमा किसी मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं की गई, बल्कि स्वयं प्रकट हुई है. उनकी झुकी हुई आकृति देखने मात्र से ही भक्तों को अलग ही शांति महसूस होती है. यहां हर बुधवार शुद्ध घी से चोला चढ़ाया जाता है और चांदी का वर्क लगाया जाता है. चोला चढ़ाने की परंपरा इतनी प्राचीन है कि इसे निभाते हुए कई पीढ़ियां बीत चुकी हैं.
LOCAL 18 से बातचीत में पुजारी नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि बुधवार के दिन गणेश जी को श्वेत रूप में सजाया जाता है, क्योंकि अलग-अलग रंग के चोले से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। इस चोला चढ़ाने की परंपरा भक्त संकल्प लेकर पूरी करते हैं किसी की शादी होनी हो, किसी की नई शुरुआत हो या कोई संकट दूर करना हो, सभी अपनी इच्छा लेकर यहां पहुंचते हैं.
पुजारियों की चौथी पीढ़ी कर रही सेवा
मंदिर के वर्तमान पुजारी नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि उनके परिवार की चौथी पीढ़ी इस मंदिर की सेवा कर रही है. सबसे पहले गोटूलाल जी शर्मा ने पूजा-पाठ की जिम्मेदारी संभाली. फिर दगड़ू लाल जी शर्मा और देवेन्द्र जी शर्मा ने इसे आगे बढ़ाया. अब अंबिकेश शर्मा और नरेंद्र शर्मा इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी मानें तो यह मंदिर सिंधिया स्टेट और अहिल्या बाई होल्कर के समय से भी पहले का है, यानी इसका इतिहास कई शताब्दियों पुराना है.
नवविवाहित जोड़ों की पहली मंज़िल
इस मंदिर की एक और खास परंपरा है शादी के पहले और बाद में हर नया जोड़ा यहां दर्शन करने आता है. यह माना जाता है कि गणेश जी के आशीर्वाद से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। स्थानीय लोग और दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु इस परंपरा को पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं.
भक्त सुनील जैन बताते हैं कि वह कई वर्षों से चिंतामण गणेश मंदिर आते रहे हैं. उनकी मानें तो जो भी मंदिर 100 वर्ष पूरे कर लेता है, उसे तीर्थ स्थल माना जाता है. यह मंदिर तो 900 साल पुराना है, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व असाधारण है. यहां प्रदेश ही नहीं, देशभर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं.
खंडवा की सबसे प्राचीन धरोहर
चिंतामण गणेश मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि खंडवा की सैकड़ों साल पुरानी संस्कृति, आस्था और धरोहर का जीवंत प्रतीक है. यहां आने वाला हर भक्त अपनी चिंताओं को दूर करके जाता है, तभी शायद इस मंदिर का नाम भी चिंतामण पड़ा. वह जो चिंताओं का हरण कर मन को शांति दे. 900 साल पुराना यह मंदिर आज भी अपनी पूरी ऊर्जा, भव्यता और चमत्कारिक आस्था के साथ खड़ा है, और आने वाली पीढ़ियां भी इसे उसी श्रद्धा से संजोती रहेंगी.