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Winter Mithai Gulab Lacchi: सर्दी के मौसम में छतरपुर की बाजारों में कैसी मिठाई देखना शुरू हो जाती है जिसे सर्दी के मौसम में सबसे ज्यादा बच्चे खाना पसंद करते हैं. इस मिठाई को बुढ़िया के बाल भी कहा जाता है.
छतरपुर जिले में ठंड के मौसम में एक ऐसी मिठाई भी आती है, जिसकी डिमांड घर-घर होती है. दरअसल, सर्दी के मौसम में बाजार में बच्चों की फेवरेट मिठाई गुलाब लच्छी आना शुरू हो जाती है.

बचपन में आपने भी यह मिठाई जरूर खाई होगी. इस मिठाई को लोग बुढ़िया के बाल भी कहते हैं. ये मिठाई ठंड के मौसम में ही आती है. हालांकि, इस मिठाई को गुलाब लच्छी के नाम से जाना जाता है.

इस मिठाई की कीमत की बात करें तो एक गुलाब लच्छी की छोटी पीस 5 रुपए में मिल जाती है. यह मिठाई बच्चों से लेकर बूढ़े तक पसंद करते हैं. लेकिन बच्चों की यह मिठाई सबसे फेवरेट होती है.
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इस गुलाब लच्छी मिठाई की खासियत होती है कि आप जैसे ही इसे मुंह में रखते हैं वैसे ही यह घुल जाती है. आपको इस चबाने की भी जरूरत नहीं होती है.

गुलाब लच्छी बनाने वाले दीपक साहू बताते हैं कि गुलाब लच्छी बनाने के लिए मैदा, शक्कर और डालडा की ज़रूरत होती है. इसको भी गजक या सोन हलवा जैसा बनाते हैं.

सबसे पहले मैदा को डालडा के साथ भूंजना होता है. भूंजने के दौरान मैदा और डालडा कढ़ाई में लगना नहीं चाहिए. इसके बाद शक्कर की चासनी बनानी पड़ती है. गुलाब लच्छी की टाटरी होती है. इसके बाद माल साफ करना होता है.

गुलाब लच्छी को बनाने के लिए चार लोगों की जरूरत होती है क्योंकि इसमें खिंचाई होती है. खिंचाई करने के बाद इसे गिलास से काटा जाता है. जैसे गजक मिठाई बनाई जाती है वैसे ही इसे भी बनाया जाता है.

यह मिठाई सर्दी के मौसम में ही बनाई जाती है. इस मिठाई को गर्मी से बचाना बहुत ही जरूरी होता है. इसलिए इस मिठाई को बनाने के बाद गीले कपड़े से ढका जाता है. गर्मी होने की वजह से यह मिठाई पिघलने लगती है. इसलिए ये मिठाई गर्मी सीजन में नहीं आती है.