Satna News: सतना की सर्द शामों में जैसे ही रोशनी, संगीत और भीड़ का माहौल दिखाई देता है तो शहर खुद ब खुद समझ जाता है कि विंध्य व्यापार मेले का समय आ गया है. बीटीआई ग्राउंड में सजने वाला यह मेला सिर्फ खरीदारी या मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सतना की व्यापारिक परंपरा, सामूहिक मेहनत और स्थानीय पहचान का प्रतीक बन चुका है. रंग-बिरंगी दुकानों, झूलों की आवाज, स्ट्रीट फूड की खुशबू और हस्तशिल्प की चमक हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच लेती है. यही कारण है कि हर दो साल में लगने वाला यह मेला शहरवासियों के लिए एक बड़े उत्सव से कम नहीं होता.
25 साल का सफर, जो पहचान बन गया
लोकल 18 से बातचीत में विंध्य चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश सुखेजा बताते हैं कि इस व्यापार मेले की शुरुआत करीब 25 वर्ष पहले सीएमएस ग्राउंड से हुई थी. समय के साथ मेले का दायरा और लोकप्रियता बढ़ती गई जिसके बाद इसे बीटीआई ग्राउंड में आयोजित किया जाने लगा. आज यह मेला विंध्य क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यापारिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है जिसे देखने के लिए लाखों लोग दो साल का इंतजार करते हैं.
19 दिसंबर से शुरू होगा इस बार का मेला
इस वर्ष विंध्य व्यापार मेला 19 दिसंबर से शुरू हो कर 29 तरीक तक चलेगा. करीब 250 स्टॉल लगाए जा रहे हैं, जिनमें सतना और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख व्यापारियों के साथ-साथ कई नए स्टार्टअप्स भी शामिल होंगे. खास बात यह है कि नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ स्टॉल निःशुल्क दिए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ की कंपनी द्वारा लगाए गए झूले बच्चों और युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर थीम, सैनिकों को समर्पण
इस बार मेले की थीम ऑपरेशन सिंदूर रखी गई है जिसे देश के सैनिकों को समर्पित किया गया है. मेले के प्रवेश और प्रमुख चौराहों पर इंडिया गेट, लाल किला और वॉर मेमोरियल जैसे प्रतीकात्मक ढांचे तैयार किए गए हैं. इसके साथ ही स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि लोकल फॉर वोकल की भावना और मजबूत हो सके.
पांच लाख दर्शक, तीन महीने की मेहनत
अध्यक्ष सतीश सुखेजा ने बताया कि इस मेले को सफल बनाने के लिए करीब 250 लोगों की टीम तीन महीने पहले से तैयारियों में जुट जाती है. 11 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में लगभग पांच लाख लोग पहुंचते है. उद्घाटन 19 दिसंबर को प्रदेश के डिप्टी सीएम करेंगे, जबकि 22 दिसंबर को प्रभारी मंत्री और 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री के आने की संभावना है.
समय में बदलाव, ग्रामीणों को राहत
इस बार एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि मेला पहले की तरह शाम 4 बजे नहीं बल्कि दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा. इससे ग्रामीण और दूरदराज से आने वाले लोग समय पर मेला देखकर सुरक्षित घर लौट सकेंगे. यही सोच इस मेले को सिर्फ व्यापारिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा उत्सव बनाती है.