Sagar News: सागर में हवाई यातायात की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार के विमानन विभाग से जुड़ी चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने बुधवार को सागर पहुंचकर ढाना हवाई पट्टी का निरीक्षण किया. 400 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस एयरपोर्ट से शुरुआत में 70 सीटर विमानों की आवाजाही संभव होगी, जो क्षेत्रीय विकास को नई उड़ान देगा.
टीम ने रनवे विस्तार, जमीन अधिग्रहण और ट्रैफिक पोटेंशियल जैसे मुद्दों पर जिला प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा की. जनवरी में दोबारा दौरा होगा, जहां फीडबैक के आधार पर अंतिम रूपरेखा तैयार की जाएगी. वर्तमान में ढाना हवाई पट्टी पर 992 मीटर लंबा रनवे है, जिसे एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए 1800 मीटर तक बढ़ाने की योजना है. विशेषज्ञों ने दो विकल्पों पर विचार किया: मौजूदा रनवे को आगे बढ़ाना या नया रनवे बनाना.
पहले विकल्प में सामने की ढलान को समतल करने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि नए रनवे के लिए भू-अर्जन की जरूरत पड़ेगी, जो अधिक महंगा साबित होगा। टीम में विमान पाटन विशेषज्ञ मनीष सिन्हा, अर्न्स्ट एंड यंग के डायरेक्टर अंशुमन श्रीवास्तव, अनुभव अरोड़ा और पल्लव गोयल शामिल थे. उन्होंने जिला अधिकारियों से सुझाव लिए कि एयरपोर्ट को वर्ल्ड क्लास कैसे बनाया जाए.
बस अनुमति का इंतजार
सागर अपर कलेक्टर अवनीश रावत ने बताया, “टीम ने ट्रैफिक और कार्गो की संभावनाओं पर गहन अध्ययन किया. बीना रिफाइनरी, वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, इंडस्ट्रियल एरिया, डॉ. हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, आईटी पार्क, डाटा सेंटर पार्क, संत रविदास संग्रहालय, प्राइवेट यूनिवर्सिटी, लोक निर्माण विभाग, एमएसएमई और अन्य औद्योगिक इकाइयों से उत्पन्न होने वाले यात्री और माल ढुलाई ट्रैफिक का आकलन किया गया. 400 करोड़ का निवेश सार्थक बनाने के लिए ये सभी क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं.” रावत ने कहा कि अनुमति मिलते ही भू-अर्जन और अन्य कार्य शुरू हो जाएंगे.
इन जिलों को भी फायदा
यह एयरपोर्ट सागर के साथ-साथ दमोह, नरसिंहपुर, रायसेन, टीकमगढ़ और पन्ना जिलों के लाखों निवासियों को हवाई सेवा का लाभ पहुंचाएगा. क्षेत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी, स्टेट यूनिवर्सिटी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, जीपी पावर प्लांट और निजी विश्वविद्यालयों की मौजूदगी से कार्गो और पैसेंजर ट्रैफिक की अपार क्षमता है. विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय प्रभाव, सुरक्षा मानकों और सहायक सुविधाओं (जैसे टर्मिनल, कार्गो हैंगर) पर भी फोकस किया. जिला प्रशासन को सौंपे गए प्रश्नावली के जवाब जनवरी में चर्चा का आधार बनेंगे.