पहले बोटिंग, फिर बैलगाड़ी की सवारी! न्यू ईयर ट्रिप को शानदार बना देंगे गोबर, मिट्टी से बने ये देसी होम स्टे

पहले बोटिंग, फिर बैलगाड़ी की सवारी! न्यू ईयर ट्रिप को शानदार बना देंगे गोबर, मिट्टी से बने ये देसी होम स्टे


Khargone News: नए साल पर अगर आप भीड़-भाड़ से दूर, शांति और सादगी के बीच ग्रामीण जीवन का असली स्वाद लेना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा किनारे बने विलेज होम स्टे आपके लिए एक बेहतरीन और यादगार विकल्प साबित हो सकते हैं. यहां पर्यटक न सिर्फ प्रकृति के करीब समय बिता रहे हैं, बल्कि गांव की संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को भी करीब से महसूस कर रहे हैं. खास बात ये कि होम स्टे तक पहुंचने का सफर भी अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है.

दरअसल, खरगोन की पर्यटन नगरी महेश्वर में हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. वे ऐतिहासिक महेश्वर किले की नक्काशी देखते हैं, नर्मदा घाट पर बैठकर शांति का अनुभव करते हैं और यहां के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को करीब से जानते हैं. लेकिन अब महेश्वर किले के सामने नर्मदा नदी के उस पार बसे ग्राम बोथू में विकसित किए गए विलेज टूरिज्म होम स्टे पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बन गए हैं.

होम तक पहुंचने का रोमांचक सफर
यहां आने वाले पर्यटकों को पहले महेश्वर पहुंचना होता है. इसके बाद नर्मदा नदी में बोटिंग करते हुए नदी पार कराई जाती है. नाव से उतरते ही गांव की पगडंडी और बैलगाड़ी सवारी उनका स्वागत करती है. बैलगाड़ी में बैठकर मिट्टी से बने खूबसूरत होम स्टे तक पहुंचना पर्यटकों के लिए किसी फिल्मी सीन से कम नहीं होता. वैसे तो महेश्वर के पास पास के क्षेत्र में करीब 22 होम स्टे बनाए जा रहे है. लेकिन, सबसे ज्यादा लोग बोथू के शिवकाशी होम स्टे को पसंद कर रहे है. चुंकि यह होम स्टे बिलकुल महेश्वर किले के सामने है.

होम स्टे की खासियत 
ग्राम बोथू में बना शिवकाशी होम स्टे पत्थर, घासi-फूस, गोबर, लकड़ी और केवलु से बना है. ये घर बाहर से भले ही साधारण दिखते हों, लेकिन अंदर से पूरी तरह सर्वसुविधा युक्त हैं. सबसे खास बात ये है कि ये घर मौसम में अनुकूल ढल जाते है. कड़ाके की ठंड में भी इन घरों में बिना हीटर प्राकृतिक गर्माहट बनी रहती है. यही वजह है कि विदेशी मेहमान भी देसी स्टाइल की इन सुविधाओं को देखकर हैरान रह जाते हैं.

होटल छोड़ पर्यटक बुक कर रहा होम स्टे 
होम स्टे संचालक जयपाल सिंह तंवर बताते हैं कि नए साल और सर्दियों के सीजन में इन होम स्टे की डिमांड काफी बढ़ गई है. देशी-विदेशी पर्यटक अब बड़े होटलों की बजाय मिट्टी से बने इन घरों में रुकना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां एक रात रुकने का खर्च करीब दो हजार रुपये है, जिसमें ब्रेकफास्ट फ्री दिया जाता है. भोजन में सिर्फ निमाड़ के पारंपरिक व्यंजन ही परोसे जाते हैं. जिसके लिए खास निमाड़ी मेन्यू कार्ड तैयार किया है, जिसमें करीब 25 तरह के देसी व्यंजन शामिल हैं.

यहां मिलेगा निमाड़ी व्यंजनों का स्वाद
पर्यटकों की डिमांड पर ये व्यंजन महज एक घंटे में ताजे बनकर तैयार हो जाते हैं. निमाड़ की प्रसिद्ध अमाड़ी भाजी, ज्वार, मक्का और बाजरे की रोटियां, देसी सब्जियां और पारंपरिक स्वाद पर्यटकों को खूब भा रहे हैं. सभी व्यंजन पूरी तरह ऑर्गेनिक होते हैं, जिनमें किसी भी तरह का रसायन नहीं मिलाया जाता. खास बात यह है कि ये पकवान जयपाल खुद अपने घर पर बनाकर मेहमानों को परोसते हैं. इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें हॉस्पिटैलिटी, होटल मैनेजमेंट और कुकिंग की ट्रेनिंग भी दी गई है.



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