मंडला तहसील के एक पटवारी संदीप कुशवाहा के मानसिक संतुलन के बिगड़ने का आरोप अधिकारियों पर लगा है। पटवारी संघ ने आरोप लगाया कि एक व्यवसायी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों ने संदीप पर लगातार दबाव डाला, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई।
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यह है पूरा मामला
पटवारी संघ का कहना है कि संदीप कुशवाहा को लगभग तीन महीने पहले निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद संपत्ति जांच के नाम पर झूठे आवेदन और दबाव के चलते उन्हें डराया-धमकाया गया।
इसके बाद हाल ही में संदीप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ अज्ञात लोग किसी डिवाइस के माध्यम से उनके परिवार को नियंत्रित कर रहे हैं और सदस्यों को घर में बंद कर दिया गया है। पोस्ट वायरल होने के बाद पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गीतू बैरागी और अन्य पटवारी संदीप के घर पहुंचे, उन्हें वह मानसिक रूप से असंतुलित मिले।
कलेक्टर राजेंद्र सिंह से की शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडला तहसीलदार, एसडीएम और अपर कलेक्टर भी संदीप के घर पहुंचे और परिवार से बातचीत की। इसके बाद पटवारी संघ के नेतृत्व में पटवारियों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर राजेंद्र सिंह से मुलाकात की और संदीप की स्थिति से अवगत कराया।
संघ का आरोप- चार महीनों से प्रताड़ित किया जा रहा
गीतू बैरागी ने बताया कि संदीप कुशवाहा को पिछले तीन-चार महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। झूठे आवेदन और दबाव के कारण उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम और कलेक्टर से चर्चा के बाद संदीप की बहाली का आदेश बैकडेट में जारी किया गया है।
बैरागी ने बताया कि मंडला का एक व्यापारी संदीप के एक रिश्तेदार की जमीन खरीदना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने अधिकारियों के माध्यम से संदीप पर दबाव डलवाया। बात न बनने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
पटवारी संघ ने बताया कि सोमवार को कलेक्टर से फिर मुलाकात कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।