भोपाल में बैंक-बीमा कर्मचारियों का प्रदर्शन: एफडीआई के विरोध में एकजुट हुए; बड़े आंदोलन की चेतावनी – Bhopal News

भोपाल में बैंक-बीमा कर्मचारियों का प्रदर्शन:  एफडीआई के विरोध में एकजुट हुए; बड़े आंदोलन की चेतावनी – Bhopal News


भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम के मध्य क्षेत्र कार्यालय के सामने बैंक और बीमा कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। वे एफडीआई के विरोध में गुरुवार की शाम को एकजुट हुए। प्रदर्शन के दौरान ही उन्होंने बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी।

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बता दें कि 16 दिसंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री ने लोकसभा में बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया। इसके तहत बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 100% तक बढ़ाने का प्रावधान है। इस पर संगठनों की स्थानीय इकाइयों के बैनरतले गुरुवार की शाम को प्रदर्शन किया गया।

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, फेडरेशन ऑफ एलआईसी क्लास वन ऑफिसर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन, जनरल इंश्योरेंस एम्प्लॉइज ऑल इंडिया एसोसिएशन, ऑल इंडिया एलआ सी एम्प्लॉइज फेडरेशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर यह प्रदर्शन हुआ।

एलआईसी ऑफिस के सामने प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी।

नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया संगठन के पदाधिकारियों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद सभा हुई। जिसे बैंक और बीमा कर्मचारी-अधिकारी संगठन के पदाधिकारी वीके शर्मा, संजय मिश्रा, दीपक रत्न शर्मा, निर्भय सिंह ठाकुर, पूषण भट्टाचार्य, योगेश गुप्ता, दिनेश झा, भगवान स्वरूप कुशवाहा, नजीर कुरैशी आदि ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि विधेयक का नाम ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक 2025’ रखा गया है। सरकार ने एक ऐसी नीति को सही ठहराने के लिए लोगों के हित में होने वाली बातें कही हैं, जो असल में जनता के हित को कमजोर करती है। यह विधेयक तीन कानूनों में संशोधन करना चाहता है: बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999। संशोधनों के बताए गए उद्देश्य बीमा क्षेत्र के विकास को तेज करना, पॉलिसीधारकों की सुरक्षा बढ़ाना, व्यापार करने में आसानी में सुधार करना और नियामक पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करना है। हालांकि, करीब से देखने पर यह साफ हो जाता है कि असली मकसद कुछ और ही खतरनाक है। इसका मकसद भारत की कीमती घरेलू बचत को विदेशी पूंजीपतियों को थाली में सजाकर सौंपना है। यह विधेयक भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक विदेशी निवेश की अनुमति देना चाहता है।

FDI को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने से न तो भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और न ही बीमा कराने वाली जनता को कोई फायदा होगा। इससे केवल विदेशी पूंजी को घरेलू बचत पर ज्यादा पहुंच और नियंत्रण मिलेगा। यह आम जानकारी है कि अर्थव्यवस्था के विकास में घरेलू बचत सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक कल्याणकारी राज्य के रूप में भारत को संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए घरेलू बचत पर अधिक नियंत्रण होना चाहिए। सभी प्रमुख विदेशी कंपनियां पहले से ही घरेलू बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी में देश में काम कर रही हैं। मौजूदा 74% FDI सीमा पर्याप्त से अधिक है और बीमा व्यवसाय में निजी क्षेत्र के विकास और विस्तार में कोई बाधा नहीं है।

वक्ताओं ने जन एवं देश हित में केंद्र सरकार से अपील की है कि बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बढ़ाई गई सीमा को अविलंब वापस लें। अन्यथा आगे आने वाले दिनों में आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहें।



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