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Jabalpur News: यह कैलेंडर न केवल कश्मीर से कन्याकुमारी तक बल्कि विदेशों तक भेजा जाता है. इसमें तीज-त्योहारों से लेकर राशिफल, भविष्यवाणी, सभी सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर महत्वपूर्ण नंबर होते हैं.
जबलपुर. लाला रामस्वरूप रामनारायण एंड संस कैलेंडर का नाम आपने सुना ही होगा और अब यह सुनकर आपको हैरानी होगी कि इस कैलेंडर की शुरुआत मध्य प्रदेश के जबलपुर से हुई थी. इसकी शुरुआत 93 साल पहले मतलब आजादी से पहले साल 1934 में हुई थी. आजादी के पहले का यह कैलेंडर अब हर घर की शान बन चुका है. शायद ही कोई घर ऐसा हो, जहां यह कैलेंडर आपको दीवार पर लटका हुआ दिखाई न दे. जबलपुर से शुरू हुआ यह कैलेंडर न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और विदेशों में भी काफी प्रचलित है. यह कैलेंडर पंचांग, तीज-त्योहारों से लेकर सारी अहम तिथियों की जानकारी देता है.
लाला रामस्वरूप रामनारायण एंड संस कैलेंडर के संपादक प्रह्लाद अग्रवाल ने लोकल 18 को बताया कि वह पिता के बाद इसकी बागडोर संभाल रहे हैं. वह दूसरी पीढ़ी हैं. पिता रामनारायण अग्रवाल इस कैलेंडर के संस्थापक थे. कैलेंडर की शुरुआत 1934 से हुई थी. उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के समय अंग्रेजी कैलेंडर में हिंदू त्योहारों का कोई भी जिक्र नहीं होता था लेकिन संस्कृत में कैलेंडर चलते थे. हालांकि बहुत से लोगों को संस्कृत में कैलेंडर देखना नहीं आता था. लिहाजा पिता रामनारायण से तिथियां और व्रत को लेकर लोग बार-बार घर आया करते थे.
500 कैलेंडर से की शुरुआत, अब 50 लाख प्रतियां
उन्होंने आगे बताया कि सारी जानकारी को अंकित कर पिता ने 500 कैलेंडर से शुरुआत की. वहीं अब 50 लाख से ज्यादा कैलेंडर प्रिंट होते हैं. उन्होंने बताया कि यह कैलेंडर न सिर्फ कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बल्कि विदेशों तक जाता है. इसमें तीज-त्योहारों से लेकर राशिफल, भविष्यवाणी और सभी सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर महत्वपूर्ण नंबर होते हैं.
आजादी के दौरान भी कैलेंडर ने निभाई थी भूमिका
प्रह्लाद अग्रवाल ने बताया कि कैलेंडर ने आजादी के दौरान अपनी अलग भूमिका निभाई थी. उनके पिता ने कैलेंडर के माध्यम से महापुरुषों के क्रांतिकारी नारों से लेकर उनकी आवाज को सकारात्मक ढंग से लोगों तक पहुंचाने का काम किया था. उन्होंने बताया कि कैलेंडर के प्रिंट होने का सिलसिला एक साल पहले से शुरू हो जाता है. 2026 शुरू होते ही 2027 के कैलेंडर को तैयार करने की शुरुआत हो जाएगी.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.