रीवाः रबी सीजन शुरू होते ही किसान खेतों में गेहूं, जौ, चना, सरसों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई में जुट जाते हैं, लेकिन इन फसलों के साथ एक और बड़ी चुनौती होती है खरपतवार की. ये खेतों में फसलों के साथ तेजी से बढ़ते हैं और पौधों के पोषक तत्व, धूप और नमी को छीन लेते हैं. इससे फसलों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए किसानों को रबी सीजन में शुरुआत से ही खरपतवार नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए.
विंध्य क्षेत्र के खेतों में एक अकड़ी नामक खरपतवार होती हैं जो फसल के साथ उगती है और फसल कटने के बाद भी अनाज के साथ मिल जाती है, राई के बीज की तरह दिखने वाली यह खरपतवार फसल को भी बर्बाद करती है और इंसान के लिए भी खतरनाक होती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर लगातार इसका अन्न के साथ सेवन किया जाए तो पथरी जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है. इसका उपयोग किसान भाई पशु चारे के रूप में भी करते हैं.
खरपतवार को भगाने का तरीका
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, किसानों को खेत से निकले खरपतवारों को तुरंत जलाने की बजाय सूखने के लिए धूप में छोड़ देना चाहिए. ये सूखकर मिट्टी में मिल जाते हैं और प्राकृतिक खाद का काम करते हैं. वहीं, जिन खरपतवारों में बीज आ चुके हों, उन्हें खेत से दूर फेंकना चाहिए ताकि वे दोबारा न उगें. कई किसान इन सूखे खरपतवारों को कंपोस्ट पिट में डालकर जैविक खाद भी तैयार करते हैं.
काटने के बजाय जड़ से निकालें
कुछ खरपतवार जैसे अकड़ी, बथुआ, कान्टा या दूब घास की जड़ें मिट्टी में बहुत गहराई तक जाती हैं, इन्हें केवल ऊपर से काटने की बजाय पूरा जड़ सहित निकालना जरूरी है. अगर इन्हें कंपोस्ट में डालना हो तो पहले सुखा लें, वरना ये कंपोस्ट में दोबारा उग सकते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि कई बार मिट्टी की गहरी गुड़ाई करने से नीचे दबे खरपतवार के बीज ऊपर आकर फिर अंकुरित हो जाते हैं, इसलिए गुड़ाई के बाद खेत का निरीक्षण करें और नई अंकुरित खरपतवारों को तुरंत निकालें. अगर किसी खेत में बार-बार खरपतवार उग रहे हों, तो कुछ समय के लिए उस भूमि को ढककर छोड़ दें. कार्डबोर्ड या प्लास्टिक की शीट से ढकने पर धूप न मिलने से खरपतवार की जड़ें खुद नष्ट हो जाती हैं.
जैविक उपाय भी कारगर
कई किसान खेत में हरी खाद का प्रयोग करते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि इसके साथ खरपतवार के अंश मिट्टी में न मिलें. यदि हरी खाद में खरपतवार के बीज हैं, तो ये आगे चलकर समस्या बन सकते हैं, इसलिए हरी खाद डालने के बाद नई खरपतवार की पत्तियां दिखें तो उन्हें तुरंत निकाल दें. रबी फसलों में खरपतवार नियंत्रण न केवल उपज बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि पौधों की सेहत और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होता है. समय पर की गई निराई-गुड़ाई और जैविक उपाय अपनाकर किसान आसानी से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं.