इंदौरः इंदौर में मल्हारगंज चौराहे के पास स्थित है 126 साल पुराने बड़े गणपति, उनके विराट रुप को देखते ही मन को अद्भुत प्रसन्नता होती है, यह मूर्ति गणेश जी का जीवंत एहसास दिलाती है. कहा जाता है कि बड़े गणपति के दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूर्ण हो जाती है. लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंदौर में बड़े गणपति से ही शुरुआत की थी.
बड़ा गणपति पर भगवान गणेश की यह मूर्ति करीब 126 साल पुरानी है. बड़ा गणपति मंदिर के पुजारी राजेश गोपाल दत्त दाधीच ने हमें बताया कि भगवान के यहां विराजमान होने की कहानी भी बड़ी ही दिलचस्प है. दरअसल गणेश जी के बड़े भक्त और पुजारी थे पंडित नारायण दाधीच वह जब भी सोते थे तो उन्हें उन्हें स्वप्न में भगवान गणेश का विराट रूप दिखाता था. तभी उन्होंने प्रण लिया कि वो अकेले गणेश जी के इस विशाल स्वरूप को हकीकत में उतारेंगे.
16 साल में तैयार हुआ मंदिर
तत्काल वह इस कार्य में जुड़ गए और होलकर रियासत से जमील ली गई 1895 में काम शुरू हुआ और 1901 में पूरा हो गया. बड़ा गणपति में भगवान की अष्टधातु से निर्मित यह मूर्ति 25 फीट लंबी और 14 फीट चौड़ी है. जो एशिया की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा है. इसे बनाने के लिए गुड़, चूना, ईंट, मिट्टी के साथ-साथ कई खास चीजें इस्तेमाल हुई हैं. साथ ही देश के सात तीर्थों अयोध्या, मथुरा, मायापुरी, काशी, अवंतिका, द्वारका आदि की पवित्र मिट्टी, देश की पवित्र नदियों का जल पंचरत्न हीरा, पन्ना, पुखराज, मोती इत्यादि का इस्तेमाल किया गया है.
साल में चार बार गणेश जी को खास चोला चढ़ाया जाता है. इस काम में करीब 8 से 15 दिन लग जाते हैं और इसमें 40 से 50 किलो शुद्ध घी और सिंदूर का इस्तेमाल होता है. भगवान के आसन के लिए सोने से सजा सिंहासन बनाया गया है. लोग यहां दूर-दूर से मन्नत लेकर आते हैं ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश से अब तक जिसने भी जो भी मांगा है कभी वह खाली हाथ नहीं लौटा सभी की मन्नत यहां पूरी होती है.
एशिया की सबसे ऊंची है गणेश प्रतिमा