सिर्फ बीज बदला और किस्मत पलट गई! सागर के किसान ने ‘काली खेती’ से एक एकड़ में कमाए 3 लाख रुपए

सिर्फ बीज बदला और किस्मत पलट गई! सागर के किसान ने ‘काली खेती’ से एक एकड़ में कमाए 3 लाख रुपए


अनुज गौतम/सागर: खेती को घाटे का सौदा मानने वालों के लिए सागर के युवा किसान आकाश चौरसिया की कहानी किसी सीख से कम नहीं है. आए दिन खेती में नवाचार और आत्मनिर्भर किसानों की कहानियां सामने आती रहती हैं, लेकिन आकाश चौरसिया ने जो प्रयोग किया है, वह वाकई चौंकाने वाला है. उन्होंने न खाद बदली, न सिंचाई का तरीका और न ही मेहनत बढ़ाई सिर्फ बीज बदले और मुनाफा तीन गुना कर लिया. एक एकड़ जमीन से उन्होंने करीब 3 लाख रुपये की कमाई कर दिखा दी.

सागर जिले के कपूरिया स्थित अपने फार्म हाउस पर आकाश चौरसिया पिछले 15 सालों से खेती में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. हर साल कुछ अलग करने की सोच रखने वाले आकाश अब किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं. उनके इनोवेटिव मल्टी लेयर कृषि फार्म पर तो देश के तीन राज्यों के चार विश्वविद्यालयों में पीएचडी तक हो रही है. इसी कड़ी में उन्होंने अब “काली खेती” का ऐसा प्रयोग किया है, जिसने किसानों के सामने मुनाफे का नया रास्ता खोल दिया है.

एक एकड़ में सिर्फ ‘काली फसलें’
आकाश चौरसिया ने एक एकड़ जमीन में परंपरागत फसलों की जगह सिर्फ काली चीजों की खेती की. इस खेत में काला गेहूं, काला चना, काली हल्दी, काले आलू और काली तिल बोई गई. खेती का तरीका बिल्कुल वही रहा, जो सामान्य फसलों में अपनाया जाता है उतनी ही सिंचाई, उतनी ही मेहनत और वही देखभाल. फर्क सिर्फ बीज का था.

नतीजा यह रहा कि जिन फसलों से पहले एक एकड़ में मुश्किल से एक लाख रुपये की आमदनी होती थी, वही फसलें अब ढाई से तीन लाख रुपये तक की हो गईं. वजह साफ है—काली फसलों की बाजार में मांग ज्यादा है और दाम सामान्य फसलों से दो से चार गुना तक मिलते हैं.

सिर्फ बीज बदलने से बदल सकती है किस्मत
किसान आकाश चौरसिया का कहना है कि कुदरत ने हमें बीजों के रूप में अनमोल खजाना दिया है. हमारे पूर्वज इन्हीं पारंपरिक और पोषक बीजों का इस्तेमाल करके लंबा और स्वस्थ जीवन जीते थे. आज जरूरत है कि किसान दोबारा इन्हीं बीजों की ओर लौटें. उनका कहना है कि काली खेती में न तो कोई खास तकनीक चाहिए और न ही अतिरिक्त खर्च. सामान्य खेती की तरह ही बुवाई करनी है, उतना ही बीज डालना है और वही मेहनत करनी है. सिर्फ बीज बदलकर खेती की लागत आधी की जा सकती है और आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकती है.

पोषण भी, मुनाफा भी
काली फसलों की सबसे बड़ी खासियत इनमें मौजूद पोषक तत्व हैं. यही वजह है कि ये बाजार में सामान्य अनाज और मसालों से अलग पहचान बनाती हैं. काले आलू की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है, क्योंकि इसमें आयरन भरपूर मात्रा में होता है. आयरन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए यह किसी दवा से कम नहीं. काला गेहूं 60 से 80 रुपये किलो, काला चना 100 से 120 रुपये किलो और काली हल्दी करीब 200 रुपये किलो तक बिक रही है. काली तिल की मांग भी लगातार बढ़ रही है.

किसानों के लिए नया रास्ता
आकाश चौरसिया का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक सोच से थोड़ा बाहर निकलकर ऐसे बीजों को अपनाएं, तो खेती फिर से मुनाफे का धंधा बन सकती है. “काली खेती” न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा सकती है, बल्कि लोगों को सेहतमंद भोजन भी दे सकती है.



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