MP Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल का दौर तेज हो गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मंगलवार रात जारी 780 नए ब्लॉक अध्यक्षों की सूची ने पार्टी में हलचल मचा दी है. सूची जारी होते ही रतलाम ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष हर्षविजय गेहलोत ने इस्तीफा दे दिया, जिसे गुटबाजी का संकेत माना जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि यह इस्तीफा पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच की पुरानी तनातनी को फिर से हवा दे रहा है, जहां ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां गुटों के बीच बंटवारे का रूप ले रही हैं.
यहां पनप रहा असंतोष
जीतू पटवारी ने अपने दो साल के कार्यकाल के अंतिम दिनों में यह बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन के बाद जारी सूची में भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत सभी प्रमुख जिलों के ब्लॉक शामिल हैं. जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह फेरबदल संगठन को मजबूत करने के लिए है. सर्वे और स्थानीय नेताओं की राय के आधार पर नाम चुने गए हैं.” लेकिन, सूची जारी होने के एक दिन बाद ही छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर और बालाघाट जैसे कमल नाथ के गढ़ों से शिकायतें उभरी हैं. कमलनाथ गुट को सूची में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिससे असंतोष पनप रहा है.
2023 से गुटबाजी!
कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं. 2023 के विधानसभा चुनाव हार के बाद कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर पटवारी को सौंपा गया था, तब से दोनों के बीच तल्खियां बरकरार हैं. अक्टूबर 2025 में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर भी विवाद हुआ था, जहां जीतू पटवारी ने सर्वे का हवाला देकर सफाई दी थी. अब ब्लॉक स्तर पर यह जंग तेज हो गई है. रतलाम में गेहलोत का इस्तीफा पारिवारिक कारणों का हवाला देकर दिया गया, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता इसे जीतू पटवारी की ‘एकतरफा’ नियुक्तियों के खिलाफ विद्रोह बता रहे हैं.
हर्षविजय ने त्यागपत्र में लिखा…
हर्षविजय गेहलोत, जो कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं, ने त्यागपत्र में लिखा, “पारिवारिक दायित्वों के कारण पद छोड़ रहा हूं.” लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, गहलोत की भोपाल भेजी ब्लॉक अध्यक्षों की प्रस्तावित सूची पर सहमति नहीं बन पाई थी, जिससे नाराजगी बढ़ी. खासकर आलोट विधानसभा क्षेत्र के सभी पांच ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों को फिलहाल रोक दिया गया है.
वहीं, कमलनाथ ने अभी तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन छिंदवाड़ा में उनके समर्थक सक्रिय हो चुके हैं. जनवरी 2025 में ही कमलनाथ ने मीडिया को बताया था कि पार्टी में सब ठीक है. गुटबाजी की अफवाहें बेबुनियाद हैं. फिर भी, अब ब्लाक अध्यक्षों को लेकर उपजा विवाद 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है. हालांकि, जीतू पटवारी का दावा है कि इस बदलाव से संगठन मजबूत होगा.