इंदौरः जोर जोर से वंदे मातरम और भारत माता के जयकारे लगाते और भगवत गीता के श्लोक पढ़ते हुए हमें एक शख्स दिखाई दिए. दिखने में वह किसी पश्चिमी देश के नागरिक लग रहे थे बातचीत में पता चला कि वह जर्मनी के हैं और अपना सब कुछ छोड़कर अपना जीवन भगवान कृष्ण को समर्पित कर चुके हैं.
एक तरफ जहां पश्चिमी सभ्यता और संपन्नता युवाओं को उपयोग कीजिए वही जर्मनी के एक नागरिक एड्रियन ब्रूनिंग कई सालों पहले अपना सब कुछ छोड़कर सनातन के प्रति समर्पित हो गए. वह कृष्ण भक्ति में ऐसा लीन हुए कि उन्होंने विश्व भर में इसके प्रचार का बीड़ा उठा लिया और अपनी पूरी पहचान को मिटाकर आचार्य अच्युतानंद स्वामी बन गए.
50 साल पहले आया था वृंदावन
जब लोकल18 ने पूछा कि ऐसी क्या चीज थी जिसकी वजह से सब कुछ छोड़कर उन्होंने अपना जीवन सनातन को समर्पित कर दिया तो आचार्य अच्युतानंद कहते हैं की भागवत गीता का संदेश की सभी जीवों को मिलकर प्रेम भाव से साथ रहना चाहिए, सभी समान है. वह ईश्वर जिन्होंने हमें बनाया, भगवान कृष्ण और सनातन संस्कृति सेबो काफी प्रभावित हुए और अपने गुरुओं के साथ इस मिशन में उनका हिस्सा बन गए.
वृंदा परिवार नाम से चला रहे मिशन
हमने उनसे कृष्ण भक्ति में लीन होने और उससे पहले के जीवन के बारे में भी बात करने की कोशिश की लेकिन उनका कहना था कि वह अपने निजी जीवन को पूरी तरह भूला चुके हैं और अपनी पुरानी यादों को भी मिटा चुके हैं। उनका अपना कुछ नहीं है जो दिया है कृष्ण का ही दिया हुआ है और भागवत गीता ही परम सत्य है.