भास्कर के कैमरे पर बोली बीजेपी नेता धाकड़ की गर्लफ्रेंड: मैं सना खान इसलिए मुझे भी मारने की कोशिश, पिता ने कराई थी बेटे की हत्या – Madhya Pradesh News

भास्कर के कैमरे पर बोली बीजेपी नेता धाकड़ की गर्लफ्रेंड:  मैं सना खान इसलिए मुझे भी मारने की कोशिश, पिता ने कराई थी बेटे की हत्या – Madhya Pradesh News


मंदसौर जिले का नाहरगढ़ थाना इलाके का हिंगोरिया बड़ा गांव इस समय सुर्खियों में है। यहां के भाजपा नेता श्यामलाल धाकड़ की हत्या की गुत्थी जब सुलझी, तो कातिल कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि उसका अपना 65 वर्षीय पिता दौलतराम धाकड़ निकला। एक पिता, जिसने महज 5 ला

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दरअसल, दौलतराम को लगता था कि उसका बेटा श्यामलाल अपनी पूरी प्रॉपर्टी गर्लफ्रेंड सना खान के नाम से कर देगा। इस डर की वजह से उसने बेटे की हत्या करवा दी। इस खुलासे के बाद हर कोई हैरान है। गांव में अजीब सा गुस्सा और खौफ का माहौल है। आरोपी पिता और उसके साथी जेल में हैं, लेकिन जिस घर में यह सब हुआ, वहां मातम और सन्नाटा पसरा है।

भास्कर ने इस केस की अहम किरदार सना खान से बात की तो उसने कहा कि श्यामलाल के पिता ने उसकी हत्या की भी सुपारी दी थी। उसके घर पर दो बार हमला भी हुआ था। उसने जैसे तैसे जान बचाई थी। सना खान और श्यामलाल की मुलाकात कैसे हुई, आखिर दौलतराम को क्यों लगा कि उसका बेटा प्रॉपर्टी प्रेमिका के नाम करने वाला है। ये जानने के लिए भास्कर की टीम हिंगोरिया बड़ा गांव पहुंची।

यहां गांव के लोगों के साथ सना खान और श्यामलाल के परिजन से बात की। पढ़िए रिपोर्ट

सना बोली- जिसने प्यार दिया वो ही चला गया नाहरगढ़ थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर, कच्चे मकानों की एक संकरी गली है। इसी गली के कोने में एक छोटा सा घर है, जिसकी ईंटों पर अभी प्लास्टर भी नहीं चढ़ा है। घर के अंदर कमरों में दरवाजे तक नहीं हैं। बरामदे में रखे दो पिंजरों में कुछ पक्षी चहचहा रहे हैं, जो बाहर के मातम से बेखबर हैं। यहीं हमारी मुलाकात इस केस के अहम किरदार सना खान से हुई।

वह हमें अंदर एक कमरे में ले गई, जहां एक डबल बेड पर एक तस्वीर रखी थी। इससे पहले कि हम कुछ पूछते, उसने वह तस्वीर उठाई और फूट-फूटकर रोने लगी। तस्वीर में वह श्यामलाल के साथ थी। सिसकियों के बीच वह बोली- इस मुश्किल भरी जिंदगी में मुझे श्याम से ही प्यार मिला था और जमाने ने उसे मुझसे छीन लिया।

सना से जब बात की तो वह श्यामलाल की तस्वीर देखकर रोने लगी।

सना से जब बात की तो वह श्यामलाल की तस्वीर देखकर रोने लगी।

श्याम ने मुझे खुदकुशी करने से बचाया

करीब पांच मिनट तक रोने के बाद वह शांत हुई। उसकी आंखें अब भी उसी तस्वीर पर टिकी थीं। हमारे टोकने पर उसने अपनी कहानी शुरू की। उसने बताया कि मैं मूल रूप से हरदा की रहने वाली हूं। मेरे माता-पिता नहीं हैं। कुछ साल पहले मेरी शादी एक हिंदू परिवार में हुई और मैं हिंगोरिया बड़ा आ गई। शादी के बाद ससुराल में रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे। रोज-रोज के झगड़ों से मैं तंग आ चुकी थी।

मैं श्यामलाल को जानती भी नहीं थी। हमारे परिवार वालों के आपस में संबंध थे, इसलिए वह कभी-कभी घर आते थे। जब भी झगड़ा होता, तो वह सुलझाने की कोशिश करते, छोटी-मोटी मदद भी कर देते थे। एक दिन झगड़ा इतना बढ़ा कि मैं आत्महत्या करने के लिए कुएं पर पहुंच गई। उस दिन श्यामलाल जी ने ही मुझे बचाया था। उस दिन मुझे उनमें एक अच्छा इंसान दिखा।

यहीं से हमारी नजदीकियां बढ़ीं और हम एक-दूसरे से प्यार करने लगे। श्यामजी भी अपने परिवार में खुश नहीं थे। उन्हें मेरे पास और मुझे उनके पास सुकून मिलता था।

सना बोली- दौलतराम ने मेरी सुपारी भी दी थी सना ने बताया कि जब श्यामलाल की हत्या हुई तो मेरा नाम उछाला गया। हत्या से एक दिन पहले 17 जुलाई की रात हम साथ थे। हम दोनों ने शाम को एक होटल में साथ खाना खाया था। रात साढ़े दस बजे तक हमारी बात हो रही। श्यामलाल ने मुझसे कहा कि नींद आ रही है, कल सुबह बात करेंगे। वह रोज सुबह सबसे पहले मुझे कॉल करते थे।

उस दिन कॉल नहीं आया। सुबह पता चला कि उनकी हत्या हो गई है। मेरा तो दुनिया ही उजड़ गई। मैं उनके घर जाने के लिए निकली, लेकिन लोगों ने मुझे रोक दिया। मैं दिन भर रोती रही। समझ नहीं आ रहा था कि कल जो इंसान मेरे साथ था, आज वह इस दुनिया में नहीं है। सना ने बताया कि श्यामलाल के पिता दौलतराम ने मेरी हत्या की भी सुपारी दी थी। दो बार मेरे घर पर हमला हुआ था।

श्यामलाल का परिवार सदमे में गांव में घुसते ही दाहिनी ओर एक पतली गली के आखिरी छोर पर ‘नायमा सदन’ है। यह श्यामलाल धाकड़ का घर है, जिसकी दीवारों का रंग अब फीका पड़ चुका है। 17 जुलाई की रात इसी घर की ऊपरी मंजिल पर उस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया था। जब हम वहां पहुंचे, तो घर के बाहर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था। बाहर एक पुराना ट्रैक्टर खड़ा था।

घर के अंदर श्यामलाल की बुजुर्ग दादी मिलीं, जो ठीक से सुन भी नहीं पा रही थीं। श्यामलाल की बहन भी वहीं थीं, जो घटना के बाद से यहीं रह रही हैं। बातचीत करने पर वह हमें उस कमरे में ले जाने को तैयार हो गईं, जहां उसके इकलौते भाई की हत्या हुई थी। उसने बताया, ‘पापा तो कई दिनों से थाने में ही हैं। आज उन्हें कोर्ट में पेश करना है, इसीलिए श्यामलाल की पत्नी और बेटे को पुलिस सुबह ही ले गई।

श्यामलाल का मकान। हत्या के खुलासे के बाद से परिवार सकते में है।

श्यामलाल का मकान। हत्या के खुलासे के बाद से परिवार सकते में है।

भरोसा नहीं हो रहा पापा ने ऐसा किया: बेटी श्यामलाल की जिस कमरे में हत्या हुई थी उस कमरे का सामान बिखरा पड़ा था। ये कमरा पहली मंजिल पर था। श्यामलाल की बहन चाबी लेकर आईं और उस कमरे का ताला खोला। कमरे में घुसते ही धूल की एक मोटी परत नजर आई, जिससे साफ था कि घटना के बाद से यहां कोई नहीं आया। कमरे में अब भी वह पलंग पड़ा था, जिस पर श्यामलाल का खून से लथपथ शव मिला था।

अब यहां सिर्फ सन्नाटा था और परिवार के अनगिनत सवाल, जिनका शायद कोई जवाब नहीं। पुलिस के सामने दौलतराम कबूल कर चुका है कि उसने ही हत्या करवाई। वजह बताई कि श्यामलाल के सना से संबंध थे और उसे डर था कि बेटा सारी जमीन उसके नाम कर देगा। परिवार अब भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा है। श्यामलाल की बहन कहती है, ‘पापा ऐसा नहीं कर सकते। हमें विश्वास नहीं हो रहा है।’

इसी पलंग पर श्यामलाल की खून से लथपथ लाश मिली थी।

इसी पलंग पर श्यामलाल की खून से लथपथ लाश मिली थी।

अब जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा यह हत्याकांड पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती थी। 18 जुलाई को श्यामलाल का शव मिलने के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ये साफ हो गया कि धारदार हथियार से हत्या की गई थी। 20 जुलाई को श्यामलाल का सना के साथ एक वीडियो सामने आया। इसी बीच, तत्कालीन थाना प्रभारी (टीआई) प्रभात गौड़ और सना के बीच बातचीत की कॉल डिटेल भी मिली।

जिसके बाद टीआई को लाइन अटैच कर दिया गया और जांच वरुण तिवारी को सौंपी गई। 26 जुलाई को पुलिस ने परिवार, दोस्तों और संदिग्धों समेत 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। इस दौरान पिता दौलतराम धाकड़ लगातार पुलिस पर दबाव बनाता रहा। वह समाज के प्रतिनिधियों के साथ एसपी को ज्ञापन देने पहुंचा।

यहां तक कि 3 नवंबर को वह एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से भी मिला और अपने ही बेटे के हत्यारों को जल्द पकड़ने की मांग की।

20 जुलाई को बीजेपी नेता श्यामलाल धाकड़ का सना के साथ ये वीडियो वायरल हुआ था।

20 जुलाई को बीजेपी नेता श्यामलाल धाकड़ का सना के साथ ये वीडियो वायरल हुआ था।

6 महीने बाद सीसीटीवी से मिला सुराग

मंदसौर एएसपी टीएस बघेल बताते हैं कि श्यामलाल की महिला मित्र से हमने पूछताछ की। इसके बाद जो वीडियो वायरल हुआ उसकी जांच की गई। जिस तरह से हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था उससे इस बात का शक था कि कोई परिचित हत्याकांड में शामिल है। हमने गांव में आने जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी।

11 दिसंबर को हमारी जांच कुछ संदिग्ध युवकों तक पहुंची। जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने दौलतराम का नाम उगल दिया। हमने दौलतराम को हिरासत में लिया। पूछताछ में वह टूट गया। उसने कबूल किया कि उसी ने अपने दोस्त गोपाल धाकड़ के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। उसने रंगलाल बाछड़ा, सुमित बाछड़ा और अटलू बाछड़ा को 5 लाख की सुपारी दी थी।

16 जुलाई की रात उसने परिवार के खाने में नशीला पदार्थ मिलाया और फिर तीनों हत्यारों को घर में बुलाकर अपने बेटे की हत्या करवा दी।

शक और डर के साये में हिंगोरिया बड़ा गांव इस खुलासे के बाद गांव का माहौल तनावपूर्ण है। लोग एक-दूसरे को शक की नजर से देख रहे हैं। ग्रामीणों ने हत्यारों का घर गिराने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन पुलिस ने यह कहकर समझाया कि मुख्य आरोपी उसी घर का सदस्य है, ऐसे में घर गिराने से बाकी परिवार वाले बेघर हो जाएंगे। ग्रामीण इस हत्याकांड के खुलासे के बाद से हैरान है।

गांव के ही गोपाल कहते हैं कि श्यामलाल एक अच्छा इंसान था। वह लोगों की मदद करता था। गांव में मुश्किल से 500 लोग रहते हैं। जब ये हत्या हुई थी तब गांव में डर पैदा कर दिया था। सभी एक ही बात सोच रहे थे कि आखिर हमारे शांतिप्रिय गांव में ऐसा कैसे हो सकता है। तब तक किसी को अंदाजा नहीं था कि उसी के पिता ने हत्या की है।

आजाद मंसूरी जिनकी दुकान पर श्यामलाल रोज आकर बैठता था, कहते हैं, ‘वह बहुत व्यवहारकुशल आदमी था। यकीन नहीं हो रहा कि उसके पिता ने ही उसे मरवा दिया।



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