स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चलाती हैं यह कैफे, तैयारी करती हैं खास नाश्ता

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चलाती हैं यह कैफे, तैयारी करती हैं खास नाश्ता


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Indore news: कैफे चलाने वाली दीपमाला अमोलिया, संगीता कदम और ऋतु अमोलिया बातचीत दौरान हमें बताया कि वह साधारण ग्रृहिणी थी. घर पर सिलाई का काम बात करती थी. बाद में वो एक महिला समूह से जुड़ गई गांव की नोडल अधिकारी आकांक्षा गुप्ता ने उन्हें यह कैफे चलाने के लिए प्रेरित किया. इसे मुख्य रूप से स्व-सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं द्वारा ही चलाया जाता है.

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इंदौरः इंदौर में जब आप ढक्कन वाला कुआं से गुजरते हैं तो आपको दिखता है दीदी कैफे. यह कोई सामान्य दुकान नहीं है बल्कि एक ऐसी नाश्ते और खाने की दुकान है जिसे केवल महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता है. जो महिला सशक्तिकरण का एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक उदाहरण है. खास बात है कि इसके संचालन के लिए प्रशासन की तरफ से महिलाओं की हर संभव मदद की गई है.

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करती हैं काम

दीदी कैफे चलाने वाली दीपमाला अमोलिया, संगीता कदम और ऋतु अमोलिया बातचीत दौरान हमें बताया कि वह साधारण ग्रृहिणी थी. घर पर सिलाई का काम बात करती थी. बाद में वो एक महिला समूह से जुड़ गई गांव की नोडल अधिकारी आकांक्षा गुप्ता ने उन्हें यह कैफे चलाने के लिए प्रेरित किया. इसे मुख्य रूप से स्व-सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं द्वारा ही चलाया जाता है.

दीदी कैफे की खासियत है कि आपके यहां से निकलते वक्त दूर से ही बढ़िया चाय और नशे की खुशबू आती है.  इनके मेनू मैं आपको चाय मुंह से लेकर आलू पराठा और मैगी समेत वेज मालवी खाने की थाली भी मिल जाएगी. दीपमाला कहतीं हैं कि आत्मनिर्भर बनकर उन्हें काफी अच्छा लगता है लोग यहां पर काम के खाने की खूब तारीफ करते हैं.

अधिकारियों ने किया सहयोग

पहले इसे शुरू करने में उन्हें थोड़ा डर लग रहा था लेकिन उनके नोडल अधिकारियों की तरफ से उन्हें प्रोत्साहित किया गया. इस कैफे के लिए प्रशासन ने ही पूरी तक मदद की, उन्हें जाकर केवल खाना बनाना शुरू करना पड़ा बाकि सारा सामान उन्हें पहले से ही तैयार मिला. खाना बनाने के बर्तन हो या फिर यह जगह और अन्य सामान सब उन्हें उपलब्ध कराया गया यहां तक कि उन्हें अपनी इस जगह का किराया भी नहीं देना है और अगर वह बाद में दुकान को बड़ा करना चाहते हैं तो प्रशासन में लोन में मदददिल कर इस दुकान को बड़ा करने में मदद करेगा.

इंदौर का यह दीदी कैफे न केवल महिला सशक्तिकरण की मिसाल है बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की और एक बड़ा कदम भी है. महिला समूह से अन्य महिलाएं प्रेरणा लेकर भी अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर रही हैं. अगर आप घर से बाहर घर का खाना खाना चाहते हैं तो दीदी कैसे आ सकते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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