हरे रंग का कीड़ा गेहूं को कर देगा पीला! बुवाई के 25 दिन बाद लगता है ये रोग, किसान जानें बचाव

हरे रंग का कीड़ा गेहूं को कर देगा पीला! बुवाई के 25 दिन बाद लगता है ये रोग, किसान जानें बचाव


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Wheat Corp Tips: कृषि विशेषज्ञों की मानें तो ये कीड़ा पौधों की जड़ों पर चिपककर रस चूसता है. धीरे-धीरे इसका असर पूरे खेत में फैलने लगता है. इस रोग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि खेत में गोल-गोल घेरे के रूप में पौधे पीले या सफेद पड़ने लगते हैं, बाद में वे पूरी तरह सूख जाते हैं.

Agri Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन सहित निमाड़ में गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है. अच्छी पैदावार की उम्मीद में किसान समय पर बुवाई, सिंचाई और खाद पर विशेष ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार शुरुआती दौर में लगने वाले रोग पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं. इन्हीं खतरनाक रोगों में से एक है जड़ का माहों रोग, जो गेहूं की बुवाई के 20-25 दिन बाद दिखाई देने लगता है. यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो पूरी फसल पीली पड़कर नष्ट हो सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जड़ का माहों रोग एक कीटजनित समस्या है. यह कीट पौधों की जड़ों पर चिपककर रस चूसता है. शुरुआत में किसान इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर पूरे खेत में फैलने लगता है. इस रोग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि खेत में गोल-गोल घेरे के रूप में पौधे पीले या सफेद पड़ने लगते हैं, बाद में वे पूरी तरह सूख जाते हैं.

माहों रोग से गेहूं को क्या नुकसान?
किसानों की मेहनत पर उस समय सबसे ज्यादा असर पड़ता है, जब इस रोग का प्रकोप बढ़ जाता है. जड़ से रस चूसे जाने के कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है, जड़ें कमजोर हो जाती हैं और पौधा जमीन से उखड़ने लगता है. समय पर नियंत्रण न होने पर यह कीट तेजी से फैलता है और कुछ ही दिनों में बड़े हिस्से की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे सीधे तौर पर उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों प्रभावित होती है.

गेहूं में कब लगता है माहों रोग
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जी.एस. कुलमी बताते हैं कि गेहूं की फसल में अलग-अलग चरणों पर कई बीमारियां देखने को मिलती हैं. कुछ रोग शुरुआती अवस्था में लगते हैं, जबकि कुछ बालियां निकलने के समय. जड़ का माहों रोग आमतौर पर बुआई के 20 से 30 दिन बाद दिखाई देता है. इसी अवस्था में कई बार दीमक भी अटैक कर देती है. जिससे किसानों को बीमारी पता करने के दिक्कत हो जाती है.

जड़ का माहों रोग की पहचान का तरीका
लेकिन, राहत की बात यह है कि दोनों के नियंत्रण के लिए एक ही दवाई का उपयोग किया जा सकता है. इससे किसानों को अलग-अलग रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत भी कम होती है. सही समय पर सही दवा का प्रयोग करने से फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जड़ का माहो रोग में कीट आमतौर पर हरे रंग की जूं जैसा दिखाई देता है, जो पौधों की जड़ों में छिपा रहता है. यह पौधों से चिपककर लगातार रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर होकर सूखने लगते हैं.

माहो रोग का नियंत्रण कैसे करें?
जब खेत में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो किसानों को तुरंत कदम उठाने चाहिए. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस रोग के नियंत्रण के लिए किसान क्लोरोपायरीफॉस दवा का एक लीटर प्रति एकड़ की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें. इससे दवा सीधे जड़ों तक पहुंचती है और कीट पर प्रभावी नियंत्रण होता है. समय पर उपचार करने से फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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