नई दिल्ली. जब विराट कोहली (Virat Kohli) मैदान पर चौका-छक्का लगाते हैं, तो स्टेडियम गूंज उठता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मैदान के बाहर वह पैसों की पारी इससे भी ज्यादा सधी हुई खेल रहे हैं. करोड़ों की मैच फीस और चमकदार विज्ञापनों से आगे बढ़कर विराट अब कंपनियों में हिस्सेदारी के दम पर अपनी दौलत बढ़ा रहे हैं.
वेस्ट दिल्ली के उत्तम नगर से निकला यह खिलाड़ी आज सिर्फ रन मशीन नहीं, बल्कि करीब 1,000 करोड़ रुपये की नेटवर्थ वाला स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर बन चुका है. ये पैसे सिर्फ क्रिकेट खेलने या ऐड करने से नहीं आए, बल्कि स्मार्ट निवेश से बढ़े हैं. दुनिया के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शुमार हुए कोहली की सोच शुरू से साफ रही- शॉर्टकट नहीं, कंट्रोल और डिसिप्लिन. यही सोच आज उनके बिजनेस फैसलों में भी दिखती है.
फिटनेस से शुरू हुआ पहला बड़ा दांव
2014-15 में विराट ने जिम और फिटनेस सेंटर की चेन चिजेल फिटनेस (Chisel Fitness) में करीब 90 करोड़ रुपये का निवेश किया. उस वक्त भारत में संगठित जिम कल्चर नया था. कोहली ने सिर्फ जिम नहीं, बल्कि लोगों की लाइफस्टाइल बदलने के ट्रेंड पर दांव लगाया. फिटनेस ने उनके करियर को नई दिशा दी थी, इसलिए उन्होंने उसी पर पैसा लगाया.
WROGN से मिली असली सीख
WROGN ब्रांड ने विराट को यह समझाया कि चेहरा दिखाने से पैसा आता है, लेकिन कंपनी की हिस्सेदारी से दौलत बनती है. इस ब्रांड की वैल्यू एक समय 250-300 करोड़ रुपये तक आंकी गई. इसके बाद कोहली ने एंडोर्समेंट कम और ओनरशिप पर ज्यादा फोकस करना शुरू किया.
One8 और बड़ा फैसला
स्पोर्ट्स ब्रांड प्यूमा (Puma) के साथ शुरू हुआ One8 धीरे-धीरे विराट का सबसे मजबूत ब्रांड बना. वन8 आज सिर्फ एक स्पोर्ट्स ब्रांड नहीं बल्कि लाइफस्टाइल की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है. इसकी वैल्यू 300 करोड़ रुपये से ज्यादा मानी जाती है. लेकिन 2025 में विराट ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने One8 को घरेलू स्पोर्ट्सवियर कंपनी एजिलिटास स्पोर्ट्स (Agilitas Sports) को बेच दिया और फिर उसी कंपनी में 40 करोड़ रुपये का निवेश कर 1.94 फीसदी हिस्सेदारी ले ली. इस फैसले से उन्होंने एक ब्रांड के जोखिम को कम किया. पूरी स्पोर्ट्स कंपनी के ग्रोथ से जुड़ गए
सोच-समझकर बनाया पोर्टफोलियो
विराट ने Digit Insurance, Blue Tribe Foods, Hyperice, MPL, Rage Coffee जैसे ब्रांड्स में निवेश किया. साथ ही FC Goa और UAE Royals जैसी स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी में भी हिस्सेदारी है.
खास बात ये है कि उनके सारे निवेश हेल्थ, फिटनेस, स्पोर्ट्स और युवाओं से जुड़े हैं. न कोई क्रिप्टो जुआ, न ट्रेंड के पीछे भागना.