Last Updated:
JABALPUR NEWS: दुनिया एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ भाग रही है, लेकिन मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहने वाले कुछ बच्चे ऐसे भी हैं, जो आंख में पट्टी बांधकर ऐसा करतब दिखाते हैं. जैसे कोई जादू चल रहा हो.. जी हां, जबलपुर के आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े हुए होनहार बच्चे ऐसा ही कुछ जादू दिखाते हैं. जो आंख में पट्टी बांधकर चेस खेल लेते हैं.
जबलपुर: दुनिया एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ भाग रही है, लेकिन मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहने वाले कुछ बच्चे ऐसे भी हैं, जो आंख में पट्टी बांधकर ऐसा करतब दिखाते हैं. जैसे कोई जादू चल रहा हो. जी हां, जबलपुर के आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े हुए होनहार बच्चे ऐसा ही कुछ जादू दिखाते हैं. जो आंख में पट्टी बांधकर चेस खेल लेते हैं, बिना देखे पढ़ कर बता देते हैं और इतना ही नहीं ड्राइंग भी कर लेते हैं.
बच्चों के इस हुनर को जानने के लिए लोकल 18 की टीम आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर पहुंची. जहां बच्चे मौजूद थे, बच्चों की आंखों में पट्टी बंधी हुई थी और बच्चे चेस से लेकर ड्राइंग और लूडो खेल रहे थे. हमें भी बच्चों को देखकर विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन हमने बच्चों की आंखों से पट्टी उतार दी. इसके बाद दोबारा पहनाई लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिसे हमें भी यकीन नहीं हुआ.
आंखों पर पट्टी बांधकर करते हैं कमाल
स्टोरी बनाने से पहले आर्ट ऑफ लिविंग के 10 साल के श्रेयस गुप्ता को हाथों की उंगली दिखाई और पूछा यह कितनी उंगली है. तब श्रेयस ने बिल्कुल सही जवाब दिया कि यह दो उंगली है. इसके बाद श्रेयस और उनके साथी ने चेस खेलना शुरू कर दिया, लेकिन एक बार फिर चेस के गेम को हमने बिगाड़ा और दोबारा चेस के मोहरे (गोटियां) को जमाने कहा, जहां बच्चों ने चंद सेकंड में ही सारे मोहरों को व्यवस्थित ढंग से जमा दिया.
ऐसा ही हुनर छोटी बच्चियों का भी था. जहां 6 साल की अनामी चौकसे लूडो खेल रही थी और डाइस में जितने अंक आते उतनी चाल लूडो में चल रही थी. जिसे देखकर जरूर हैरानी हुई, लेकिन सभी करतब बिना देखे ही हो रहे थे. इसके बाद हमने हमारी माइक आईडी में लिखे हुए चीजों को पढ़ने कहां तब बच्चे ने तुरंत ही जवाब दिया माइक आईडी में लोकल 18 लिखा हुआ है…वहीं बिना देखे ड्राइंग बना रहें बच्चे ने पेंसिल कलर को छूकर बता दिया कि हाथ में पकड़ा हुआ कलर कौन सा है.
17 दिन का होता हैं प्रोग्राम, योग से होती हैं शुरुआत
आर्ट ऑफ़ लिविंग इंस्टीट्यूशन की गरिमा खंडेल ने बताया श्री श्री के द्वारा दिया गया यह इंस्टीट्यूशन प्रोग्राम है. जो 17 दिन का ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रोग्राम होता है, उन्होंने बताया प्रोग्राम में साइंटिफिक तकनीक बताई जाती है. जिसमें योग, ध्यान और प्राणायाम शामिल होता है. निरंतर प्रयास करने के बाद बच्चों के अंदर क्षमताएं विकसित हो जाती हैं. जहां बच्चे फोकस होकर हर चीज बता देते हैं. इस प्रक्रिया को सिर्फ 18 साल के बच्चों तक ही सिखाया जाता है. बच्चों का जब मन शांत हो जाता है, तब छठी इंद्रियां जागृत होती हैं. जहां बच्चों के सोचने की शक्ति बढ़ जाती है.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें