छतरपुरः छतरपुर के रहने वाले विपिन अवस्थी जो 3 स्कूल का संचालन करते हैं. लेकिन इनके मन में समाज के लिए कुछ करने का जज्बा था और आज विपिन जीवन भर समाज सेवा करने का संकल्प ले चुके हैं. लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि वह बचपन से ही खर्चीले स्वभाव के थे. उम्र बढ़ने के साथ उनकी खर्च करने की आदतें भी बढ़ती गईं. विपिन की इन आदतों से परेशान होकर उनके पिता ने उन्हें सख्त डांट लगाई, जिससे विपिन की जिंदगी बदल गई.
पिता की डांट से बदला जीवन
एक दिन पिता ने सख्त लहजे में समझाया कि जो इतना पैसा खर्च कर रहे हो, अगर यही पैसा असहाय और गरीब कन्याओं की शादी के लिए खर्च करोगे तो मुझे खुशी होगी. पिता की उस दिन की डांट से विपिन ने फैसला कर लिया कि अब समाज के कार्यों में पैसे खर्च करने हैं. पिता की सीख के बाद उन्होंने 2017 में संगम सेवालय संस्था की शुरुआत की. इस संस्था में सबसे पहले रोटी बैंक और कपड़ा बैंक का संचालन किया, जो उस समय इतना चला कि फिर वृक्षारोपण, गौरेया संरक्षण, फ्री पानी पिलाना, और मेडिकल उपकरण फ्री में बांटना शुरु किया.
एंबुलेंस से लेकर, गरीब कन्याओं की शादी
विपिन कुमार बताते हैं कि हर साल 1 हजार गरीब बेटियों को बैग, बॉटल और टिफिन वितरित करते हैं. पिछले 4 साल से गरीब कन्याओं के विवाह करा रहे हैं. हर साल 2 गरीब कन्याओं की शादी कराते हैं. इन गरीब कन्याओं को सोने के जेवर से लेकर छोटी-बड़ी चीजें सब देते हैं. वहीं 3 एंबुलेंस चलवाते हैं. ट्री एंबुलेंस चलवाते हैं, रोटी एंबुलेंस चलवाते हैं और पार्थिव शरीर के लिए भी एंबुलेंस चलवाते हैं.
समाजसेवी विपिन बताते हैं कि हर साल समाज सेवा में 20 से 25 लाख रुपए खर्च आ जाता है. अपनी कमाई का 25 फीसदी समाज सेवा में ही खर्च करते हैं. हमारी आय का सोर्स स्कूल हैं. 3 स्कूल चलाते हैं जिसमें 1 स्कूल संगम सेवालय के नाम से चलाते हैं. इस स्कूल की पूरी कमाई ही समाज सेवा में लगाते हैं. विपिन कुमार बताते हैं कि वे अपनी कमाई का 25 फीसदी समाज सेवा में खर्च करते हैं. जब वे असहाय लोगों की मदद करते हैं और उनके खुशी के चेहरे देखते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है. साथ ही पिता की वो बात दिल को छू जाती है.
घर को भी बना देंगे वृद्धाश्रम
विपिन बताते हैं कि मेरे 2 बेटियां हैं. इन बेटियों के विवाह के बाद इस बिल्डिंग में वृद्धाश्रम खोल देना है. मैं और मेरी पत्नी दोनों जीवन भर यही काम करते रहेंगे. यही हमारा संकल्प है. विपिन कुमार बताते हैं कि 2017 के पहले उन्हें बीपी और सिरदर्द की समस्या रहती थी, लेकिन जब से समाज सेवा में लगे हैं, उन्हें अब बीपी की गोलियां भी नहीं लेनी पड़ती और न ही सिरदर्द की समस्या है. मन बहुत प्रसन्न रहता है और रात में नींद बहुत अच्छी आती है. लोगों के मुस्कराहट वाले चेहरे देखकर उन्हें जो आनंद आता है, वो किसी और चीज में नहीं आता.