5 साल उम्र, 40 फीट ऊंचा, 300 फल से लदा, इस पपीते पेड़ के आगे सागौन भी बौना! जड़ में देसी चीज डालने से कमाल

5 साल उम्र, 40 फीट ऊंचा, 300 फल से लदा, इस पपीते पेड़ के आगे सागौन भी बौना! जड़ में देसी चीज डालने से कमाल


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Tallest Papaya Tree: बालाघाट के आदिवासी बहुल गांव में साल 2020 में पपीते का एक पौधा लगाया गया था. वह धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि अब वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाला है. पांच से यह पेड़ साल में दो बार फल देता है. इस समय पेड़ पर 300 से ज्यादा फल लगे हैं.

Balaghat News: पपीते का पेड़ अमूमन 10-12 फीट ऊंचा होता है. पेड़ पर 8-10 फल लगे होते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बालाघाट के आदिवासी अंचल में पपीते का एक ऐसा पेड़ है, जिसकी ऊंचाई 40 फीट से भी ज्यादा है. तने की मोटाई सागौन के पेड़ जैसी. यह पेड़ कभी नक्सल प्रभावित रहे गांव कसंगी के पूर्व सरपंच बस्तर सिंह पंद्रे के यहां लगा है. इस पेड़ को जो भी देखता हैरान रह जाता है. ये पेड़ साल में दो बार फल देता है, जिसे बेचकर उन्हें थोड़ी बहुत आय मिलती है. जानिए क्यों खास है ये पेड़…

5 साल पुराना पेड़ और हाइट 40 फीट
बालाघाट के आदिवासी बहुल गांव में पूर्व सरपंच बस्तर सिंह पंद्रे की बहू ने साल 2020 में इस पेड़ को लगाया था. वह धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि विशाल वृक्ष बन गया. पांच साल से यह पेड़ साल में दो बार फल देता है. वहीं, इस पर 12 ज्यादा शाखाएं हैं, जिन पर 300 से ज्यादा फल लगे हैं. परिवार का कहना है कि ये पपीते बहुत मीठे, रसदार और स्वादिष्ट होते हैं. बताया कि उन्होंने पेड़ को बड़ा करने के लिए सिर्फ घर के चूल्हे की राख डाली थी. लगातार पेड़ बड़ा होता गया और उसमें फल लगते गए.

किसानों को लिए शानदार उदाहरण 
कृषि के जानकार एवं समाजसेवी महेंद्र मेश्राम का मानना है कि यह पपीते का पेड़ प्राकृतिक खेती और देसी तरीकों की ताकत को दिखाता है.उनका यह भी कहना है कि बिना किसी रसायन के सिर्फ घरेलू खाद से इतना बड़ा और फलदार पेड़ तैयार होना किसानों और बागवानी करने वालों के लिए अच्छा उदाहरण है. आदिवासी क्षेत्र में सक्रिय होकर काफी सालों से पत्रकारिता कर रहे रफ़ी अंसारी भी बताते हैं कि उन्होने भी इतना बड़ा पपीते का पेड़ कभी नहीं देखा. पेड़ में मोटी टहनियां भी हैं, जो पपीते के पेड़ों में दिखाई नहीं देतीं.

शायद इसलिए हुई इतनी ग्रोथ
बस्तर सिंह बताते हैं कि उन्होंने यह पपीते का पौधा करीब पांच साल पहले अपने घर के पीछे आंगन में लगाया था. उन्होंने इसमें किसी भी तरह की रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया. घरेलू उपाय के तौर पर चूल्हे की ठंडी राख पेड़ के चारों ओर डालते रहे. यही राख धीरे-धीरे खाद का काम करती रही और पेड़ को भरपूर पोषण मिला. इस पपीते के पेड़ की सबसे खास बात ये कि इसमें सामान्य पपीते के पेड़ों की तरह सिर्फ एक सीधा तना नहीं है, बल्कि इसमें जगह-जगह मोटी और मजबूत टहनियां निकली हुई हैं. देखने में यह पेड़ किसी दूसरी फलदार प्रजाति जैसा लगता है. पेड़ पर इस समय 250 से 300 तक पपीते लगे हैं.

नेशनल ही नहीं वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी टक्कर
बता दें कि भारत में सबसे ऊंचा पपीता पेड़ उगाने का रिकॉर्ड तमिलनाडु के मदुरै में एक किसान के नाम पर है. उस पेड़ की ऊंचाई 41 फीट यानी 12.5 मीटर है. वहीं, विश्व रिकॉर्ड की बात करें तो इसमें ब्राजील का नाम सामने आता है. वहां उगे पपीते पेड़ की ऊंचाई 47.83 फीट दर्ज की गई है. ऐसे में बालाघाट के पेड़ की उम्र के साथ ऊंचाई और बढ़ती है तो यह नेशनल रिकॉर्ड तो तोड़ ही देगा.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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5 साल उम्र, 40 फीट ऊंचा, 300 फल से लदा, पपीते पेड़ के आगे सागौन बौना! वजह कमाल



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