सतना. बघेलखंड क्षेत्र में जल स्रोतों की भरपूर उपलब्धता के कारण सिंघाड़े की खेती वर्षों से होती आ रही है लेकिन अब तक अधिकांश किसान इसे कच्चे रूप में बेचकर सीमित मुनाफे तक ही सिमटे रहे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी सिंघाड़े की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग शुरू कर दी जाए, तो किसानों को छोटे-मोटे व्यवसाय की तलाश कहीं और करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. कच्चे सिंघाड़े की तुलना में इसके प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमत कई गुना अधिक होती है. वहीं प्रोसेसिंग से इसकी शेल्फ लाइफ भी बढ़ जाती है, जिससे खराब होने से होने वाला नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कम निवेश से भी शुरुआत संभव
लोकल 18 से बातचीत में आरएचईओ मीनाक्षी वर्मा ने बताया कि सिंघाड़ा प्रोसेसिंग यूनिट की शुरुआत ₹2 लाख से लेकर ₹25 लाख तक की लागत में की जा सकती है. छोटे स्तर पर काम शुरू करने वालों के लिए सिंघाड़ा छीलने वाली मशीन करीब ₹15,000 से ₹45,000 तक में आ जाती है, जिसमें एक छोटा ड्रायर और कमर्शियल आटा चक्की पर्याप्त होती है. यह सेटअप स्थानीय बाजारों के लिए सूखा सिंघाड़ा या सिंघाड़ा आटा तैयार करने के लिए उपयुक्त है और कम जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न देता है.
मध्यम और बड़े स्तर पर बढ़ती क्षमता
यदि कोई किसान या उद्यमी थोड़ा बड़े स्तर पर शुरुआत करना चाहता है, तो ₹8 लाख के आसपास ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग मशीनें, बड़े ड्रायर और पैकेजिंग मशीन लगाकर 100 से 150 किलो प्रति घंटा की क्षमता से काम किया जा सकता है. वहीं बड़े स्तर पर ₹25 लाख या उससे अधिक की लागत वाले पूरी तरह ऑटोमैटिक प्लांट उपलब्ध हैं, जिनमें धोने से लेकर छीलने, सुखाने और पैकेजिंग तक की पूरी प्रक्रिया मशीनों से होती है.
सरकारी योजना से सब्सिडी का सहारा
अधिकारी ने बताया कि यह समय सिंघाड़े की कटाई का है और बाजार में इसकी आवक भी शुरू हो चुकी है. ऐसे में किसान थोड़े से निवेश और सरकारी सहायता के साथ अपना मजबूत व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं. प्रधानमंत्री माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइज (PMFME) योजना के तहत सिंघाड़ा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है, जिससे कुल लागत काफी कम हो जाती है.
ब्रांडिंग से बनेगी पहचान
सिंघाड़े को प्रोसेस कर आटा, पाउडर, चिप्स, स्नैक्स, कटलेट, भर्ता या सूखा सिंघाड़ा तैयार किया जा सकता है. इन्हें सिंघाड़ा आटा, व्रत का आटा या सिंघाड़ा पाउडर जैसे नामों से ब्रांड कर बेचा जा सकता है. नवरात्रि और अन्य व्रत-त्योहारों में इसकी मांग विशेष रूप से बढ़ती है क्योंकि यह ग्लूटेन फ्री और पौष्टिक होता है. सही योजना, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के साथ बघेलखंड का सिंघाड़ा अब किसानों के लिए सोने में सुहागा साबित हो सकता है.