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Christmas news उज्जैन मे इन दिनों नए साल के साथ पुरे शहर मे क्रिसमस की तैयारी जोरो पर है. शहर के दो प्रमुख चर्च विद्युत रौशनी से इन दिनों जगमगा रहे है. आखिर उज्जैन के चर्च मे क्रिसमस की रात क्या आयोजन किया जाएगा और आखिर इनमे से कैथोलिक चर्च मे क्या आयोजन होगा और इस चर्च का क्या महत्व है. आइए जानते है.
धार्मिक नगरी उज्जैन मे हर पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसी कड़ी मे अभी इन दिनों नए साल के साथ क्रिसमस की तैयारी जमकर देखने को मिल रही है. उज्जैन शहर के साथ इन दिनों चर्च मे आकर्षण साज-सजा देखने को मिल रही है.

उज्जैन मे सबसे बड़े चर्च की बात करे तो देवास रोड स्थित कैथोलिक चर्च डायोसिस ऑफ उज्जैन की स्थापना को लगभग 50 वर्षों से भी पुराना है. बताया जाता है कि इस चर्च की स्थापना 1968 में हुई थी. कैथोलिक चर्च डायोसिस ऑफ उज्जैन की स्थापना संत पापा पॉल ने इंदौर धर्म प्रांत के कुछ हिस्सों को उज्जैन धर्म प्रांत में शामिल कर की थी. कैथोलिक चर्च डायोसिस ऑफ उज्जैन का कार्य क्षेत्र उज्जैन, शाजापुर और आगर-मालवा तक फैला है.

उज्जैन में कैथोलिक समाज का आगमन 1920 में हुआ था, जब बहुत ही कम संख्या में गोवन, एंग्लो-इंडियन, तमिल व केरल के लोग यहां आए थे. 1933 में फादर विलियम ल्युजेन ने उज्जैन के धार्मिक विकास के लिए शुरुआती पहल की थी. पहला पवित्र बलिदान उज्जैन के रेलवे स्टेशन में हुआ, जो वर्तमान में ग्रांड होटल के रूप में जाना जाता है.
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पूर्वजों की स्मृति और उनकी आत्मा की शांति के लिए ईसाई समाज हर वर्ष ऑल सोल डे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाता है. उज्जैन के ऋषिनगर स्थित संत मेरी कैथोलिक चर्च के फादर ने जानकारी देते हुए बताया कि कैथोलिक ईसाई समुदाय में इस दिन को मृत विश्वासी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा है.

इस अवसर पर समुदाय के लोग सुबह से ही अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर पहुंचकर उनकी साफ-सफाई और सजावट करते हैं. कब्रों पर रंग-रोगन, फूलों की सज्जा और मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है. चर्च में सामूहिक पवित्र पूजा और विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन होता है.

मान्यता है कि जीवनकाल में यदि दिवंगत आत्माओं के कुछ पापों की क्षमा शेष रह जाती है, तो ऑल सोल डे के दिन की गई प्रार्थनाओं से उनके उन पापों की क्षमा होती है और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है.1952 में इंदौर धर्म प्रांत की स्थापना के बाद प्रथम पल्ली पुरोहित के रूप में फादर बर्नाड उज्जैन में नियुक्त हुए थे. 7 मार्च 1962 को होली ट्रिनिटी चर्च उज्जैन की स्थापना हुई.29 जुलाई 1968 को इसे उज्जैन धर्म प्रांत के रूप में घोषित किया गया.

कुशीनगर स्थित चर्च के फादर ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव क्रिसमस को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है. 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व की तैयारियां ज़ोर-शोर से की जा रही हैं. इसी क्रम में ईसाई समुदाय द्वारा घर-घर जाकर प्रभु यीशु के भजन और गीत गाए जा रहे हैं, ताकि प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश हर घर तक पहुंच सके.

फादर ने बताया कि 24 दिसंबर की मध्यरात्रि को सभी चर्चों में विशेष आयोजन किए जाएंगे. रात 11:30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी, जिसके बाद ठीक 12 बजे प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इसी श्रृंखला में शहर में एक भव्य चल समारोह भी निकाला जा रहा है, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरेगा और अंत में पुनः चर्च परिसर में पहुंचकर संपन्न होगा. इस आयोजन के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया जाएगा.