सागर: सागर जिले में इस साल करीब 5 लाख हेक्टेयर में रवि सीजन की बुवाई की गई है. जिसमें गेहूं चना मसूर मटर प्रमुख रूप से शामिल है. किसानों के द्वारा पिछले दो महीने से कड़ी मेहनत कर अपनी फसलों को तैयार किया जा रहा है लेकिन अब यही किसान चिंतित है. वह अपनी फसल को आंखों के सामने बर्बाद होता देख रोने को मजबूर है क्योंकि जंगलों के वन्य जीव खेतों की तरफ कूच कर रहे हैं. जिसमें हिरण नीलगाय बंदर और जंगली सूअर है जंगली सूअर जी किसान के खेत में पहुंच जाते हैं और जितनी जगह में बैठ जाते हैं.
वह फसल पूरी तरह से तबाह हो जाती है क्योंकि वह अपना मुंह जमीन में लगाकर खोद डालते हैं, और उसी खेत में लोटते रहते हैं, इसी तरह हिरण और नीलगाय गेहूं की फसल को बड़े चाव के साथ खाते हैं, उनके पसंदीदा भोजन में से एक है गेहूं को खाने से उसे पूरी तरह से ढूंढी कर देते हैं. जिससे उनमें बालिया नहीं निकाल पाती, बंदर चना मसूर और मटर के खेत में पहुंचकर उनके छोटे-छोटे दानों को खा लेते हैं गेहूं की फसल पर पेड़ों पर चढ़कर कूदते हैं जिससे फसल खराब हो जाती है.
इन गावों में है असर
सिमरिया के किसान नीरज सिंह ने बताया कि कड़ाके की ठंड में किसान खेतों में मेहनत करके अपनी फसल को तैयार करते हैं लेकिन जंगली जानवर इनको नुकसान पहुंचा रहे हैं कई बार वन विभाग में और अन्य जगह पर शिकायत कर चुकी है लेकिन इनका कोई उपाय नहीं किया जा रहा है. खेती में ही जो अनाज निकलता है उसी से हम लोगों का परिवार चल रहा है जब फसल नहीं होगी तो क्या करेंगे.
खेत में कर दें छिड़काव
सागर में कृषि विभाग के अधिकारी जितेंद्र सिंह राजपूत बताते हैं कि अगर किसान भाइयों के खेत जंगल के किनारे पर है तो इसका सबसे अच्छा उपाय है कि वह अपने खेत में फेंसिंग कर ले, फेंसिंग के रूप में बाय बाढ़ लगा सकते हैं कई जगह पर पत्थर की बाउंड्री भी बना लेते हैं इसके अलावा जो बंबू मिशन चल रहा है, उसमें अपनी मेढ के किनारे पर घने बंबू लगा ले तो इससे भी जंगली जानवर से सुरक्षा होती है, कुछ ध्वनि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं जो रात के समय बजे उनकी आवाज सुनकर जंगली जानवर दूर रहते हैं, इसके अलावा कुछ बाजार में केमिकल आते हैं जिनको अपने खेत की मेड़ के चारों तरफ डाल दें उनकी बदबू की वजह से जंगली जानवर नहीं आते और गोमूत्र डालने से भी इसकी बदबू की वजह से कई बार जंगली जानवर खेतों में नहीं आते हैं.