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Satna Live Sketch Teacher Success Story: लॉकडाउन के दौरान मिला खाली समय सतना की एक शिक्षिका के लिए नई राह बन गया. क्लासरूम तक सीमित पहचान अब आर्ट की दुनिया में फैल चुकी है. लाइव स्केचिंग, पेंसिल पोर्ट्रेट और एक्सप्रेसिव आर्ट के जरिए वह आज शौक को कमाई और पहचान में बदल रही हैं.
शिवांक द्विविद, सतना : कोरोना ने जहां कई लोगों की जिंदगी रोक दी थी वहीं कुछ लोगों के लिए यह दौर खुद को पहचानने और छिपे हुनर को बाहर लाने का मौका भी बना. मध्यप्रदेश के सतना जिले की शिक्षिका इसी लॉकडाउन में शौक को अपना पेशा ही मान लिया, स्कूल की छुट्टियों और खाली समय के बीच उन्होंने अपने भीतर छिपे आर्ट को तराशा और आज वही शौक उनकी अलग पहचान बन चुका है. पढ़ाने के साथ-साथ ममता अब लाइव पेंटिंग और स्केचिंग के जरिए लोगों को आकर्षित कर रही हैं और शहर की उभरती आर्टिस्ट के रूप में जानी जा रही हैं.
पढ़ाई से प्रोफेशन तक का सफर
लोकल 18 से बातचीत में ममता सिंह ने बताया कि वह मूल रूप से एक प्रोफेशनल टीचर हैं और क्राइस्ट ज्योति में छोटे बच्चों को पढ़ाती है, उनके टीचिंग का करियर एक दशक से ऊपर का है. बायोलॉजी की स्टूडेंट होने के कारण ड्राइंग में उनकी रुचि पहले से थी लेकिन उसे कभी करियर के रूप में नहीं सोचा. कोरोना काल में जब स्कूल बंद थे और समय अधिक था तब उन्होंने अपने शौक को गंभीरता से अपनाने का फैसला किया. पेंटिंग, राइटिंग और एंकरिंग जैसे क्रिएटिव काम पहले से उनके जीवन का हिस्सा थे लेकिन इस खाली वक्त ने उन्हें खुद को तलाशने का मौका दिया.
यूट्यूब से सीखी कला, अभ्यास से निखरा हुनर
ममता बताती हैं कि उन्होंने यूट्यूब और विदेशी आर्टिस्ट्स की वीडियो देखकर पेंटिंग और स्केचिंग की बारीकियां सीखी. लगातार अभ्यास के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह कला उतनी कठिन नहीं है जितनी पहले लगती थी. धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने लाइव स्केचिंग की शुरुआत की. शुरुआत में वह लोगों के पोर्ट्रेट मुफ्त में बनाती थीं ताकि खुद को बेहतर समझ सकें और लोगों की प्रतिक्रिया जान सकें.
लाइव स्केचिंग बनी पहचान
आज ममता सिंह आधे घंटे में हूबहू लाइव स्केचिंग करने में माहिर हो चुकी हैं. पेंसिल पोर्ट्रेट्स के साथ-साथ वह कैनवास पर भी लगातार अभ्यास कर रही हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी लाइव स्केचिंग के लिए 500 रुपये चार्ज करना शुरू किया है. उनकी कला में रचनात्मकता के साथ-साथ बोल्ड और एक्सप्रेसिव थीम भी देखने को मिलती है जिसे कला प्रेमियों से काफी सराहना मिल रही है.
परिवार का मिला पूरा सहयोग
ममता की इस यात्रा में परिवार का सहयोग भी अहम रहा है. 20 वर्ष की उम्र में शादी होने के बाद भी उनके पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया. बेटे शिवांश और बेटी सृष्टि भी मां को अपना पैशन फॉलो करते देख गर्व महसूस करते हैं. ममता कहती हैं कि प्रोफेशन एक जिम्मेदारी है लेकिन जब इंसान खुद को ढूंढ लेता है और अपनी असली पर्सनैलिटी को पहचान लेता है तो जो खुशी मिलती है वह अलग ही होती है.
कला के कई रूप, एक कलाकार
बोल्ड पेंटिंग पर सवाल के जवाब में ममता कहती हैं कि एक कलाकार के भीतर कई रूप होते हैं और वही भावनाएं वह कागज पर उतारने की कोशिश करती हैं. आज ममता सिंह न सिर्फ एक शिक्षिका हैं बल्कि सतना की उभरती आर्टिस्ट भी हैं जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सही समय और लगन से शौक भी पहचान और प्रोफेशन बन सकता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें