किसान होना कठिन! दिन में नहीं लाइट, सर्द रात में खेतों में पानी देना मजबूरी

किसान होना कठिन! दिन में नहीं लाइट, सर्द रात में खेतों में पानी देना मजबूरी


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Shivpuri News: किसानों ने लोकल 18 से कहा कि ठंड के मौसम में सिंचाई करना किसी सजा से कम नहीं है. रात में जब बिजली आती है, तो ही मोटर से पानी आता है, तो हाथ बर्फ जैसे ठंडे हो जाते हैं. कई बार तो हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं और काम करना मुश्किल हो जाता है.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अमू मां क्षेत्र में इन दिनों किसान भारी परेशानी से जूझ रहे हैं. कड़ाके की ठंड के बीच उन्हें रात के समय खेतों में जाकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है. वजह साफ है, दिन के समय बिजली की सप्लाई नहीं मिलना. किसानों का कहना है कि दिन में अगर बिजली मिल जाए, तो उन्हें इस हाड़ कंपाती ठंड में रातभर खेतों में नहीं जागना पड़े लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. पुरा गांव के किसान श्रीराम कुशवाहा लोकल 18 को बताते हैं कि उनके गांव में दिन के समय बिल्कुल भी बिजली नहीं आती. मजबूरी में पूरे गांव के किसान रात के अंधेरे में ठंड के बीच खेतों में फसलों को पानी देने जाते हैं. उन्होंने कहा कि रात को खेत में जाना आसान नहीं होता. ठंड इतनी ज्यादा होती है कि शरीर कांपने लगता है लेकिन फसल बचाने के लिए जाना ही पड़ता है.

किसानों ने बताया कि ठंड के मौसम में सिंचाई करना किसी सजा से कम नहीं है. रात के समय जब पानी चलता है, तो हाथ बर्फ जैसे ठंडे हो जाते हैं. कई बार तो हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं और काम करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में किसान खेत के किनारे अलाव जलाते हैं, हाथ सेंकते हैं, तब जाकर दोबारा मोटर चलाने या नालियां ठीक करने का काम कर पाते हैं. उनका कहना है कि ये हालात सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक हैं लेकिन उनकी मजबूरी है.

सरकार का दावा हवाहवाई?
किसानों का आरोप है कि सरकार ने दिन में किसानों को बिजली देने का दावा किया था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. विद्युत विभाग अपनी मनमानी कर रहा है और किसान सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं. दिन में बिजली न मिलने से सिंचाई का पूरा काम रात में करना पड़ता है, जिससे किसान शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से थक चुके हैं.

सर्दी में सुन्न हो जाते हैं हाथ-पैर
इसी गांव के किसान लखन कुशवाहा बताते हैं कि उन्होंने गेहूं की फसल बोई है, जिसमें करीब 5 से 6 बार पानी देना जरूरी होता है लेकिन बिजली की अनियमित सप्लाई की वजह से उन्हें हर बार रात को खेत जाना पड़ता है. सर्दी में हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं. कई बार अलाव जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिलती और घंटों कड़ाके की ठंड में खड़ा रहना पड़ता है. समझ नहीं आता कि इसे किसान की बेबसी कहें या सिस्टम की नाकामी.

रात में अचानक काट देते हैं बिजली
किसानों ने यह भी बताया कि सिंचाई के दौरान कई बार रात में अचानक बिजली काट दी जाती है. जैसे ही बिजली जाती है, मोटर बंद हो जाती है और पानी रुक जाता है. फिर किसान को पूरी रात वहीं रुककर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है. बिजली आने पर दोबारा मोटर चालू करनी पड़ती है. इस दौरान किसान का पूरा शरीर पानी में भीग जाता है और ठंड और ज्यादा बढ़ जाती है.

गीले कपड़ों में झेलनी पड़ती है ठंड
किसानों का कहना है कि रात भर गीले कपड़ों में ठंड झेलना बहुत मुश्किल होता है. अलाव का सहारा लेकर किसी तरह शरीर को गर्म रखने की कोशिश की जाती है लेकिन फिर भी ठंड से बचना आसान नहीं होता. किसानों की यह दुर्दशा देखकर भी कोई उनकी समस्या समझने को तैयार नहीं है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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