गेहूं की फसल के देखभाल टिप्स: खंडवा जिले समेत पूरे निमाड़ अंचल में इन दिनों मौसम का मिजाज किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. दिन में तेज धूप और रात में बढ़ती ठंडक का सीधा असर अब खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पर दिखने लगा है. खास बात यह है कि इसी बदलते मौसम में गेहूं की जड़ों पर हमला करने वाली जड़मऊ इल्ली तेजी से फैल रही है, जो चुपचाप फसल को कमजोर कर देती है.
कैसे नुकसान पहुंचाती है जड़मऊ इल्ली?
दिन के समय गर्मी और खेत की मिट्टी में बनी नमी जड़मऊ इल्ली के लिए सबसे मुफीद माहौल बनाती है. यह कीट सीधे गेहूं की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है. नतीजा यह होता है कि पौधे की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर हो जाता है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
30 से 35 दिन की फसल पर ज्यादा खतरा
जय कृषि किसान क्लीनिक के कृषि सलाहकार सुनील पटेल बताते हैं कि पिछले दो सालों से जड़मऊ इल्ली गेहूं की फसल के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है. खासकर जब फसल 30 से 35 दिन की होती है, उसी वक्त इसका हमला सबसे ज्यादा होता है. अगर इस समय इलाज नहीं किया गया, तो किसान को प्रति एकड़ 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका
सुनील पटेल के मुताबिक, जड़मऊ इल्ली से बचाव की शुरुआत बीज बोने से पहले ही करनी चाहिए.
बुआई से पहले गेहूं के बीज को इमिडाक्लोप्रिड 48% FS (2 मिली प्रति किलो बीज) से उपचारित करें.
अगर 20–25 दिन की फसल में इल्ली के लक्षण दिखें, तो पहली सिंचाई के साथ
क्लोरोपायरीफॉस दानेदार 5 किलो प्रति एकड़
या फिप्रोनिल 5 किलो प्रति एकड़ खाद में मिलाकर डालें.
छिड़काव से भी मिलेगा मजबूत नियंत्रण
अगर प्रकोप ज्यादा हो, तो किसान इमिडाक्लोप्रिड 70% WP (75 ग्राम) + क्लोरोपायरीफॉस 50% + साइपरमेथ्रिन 5% (500 मिली) को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं. समय पर सही दवा डालने से फसल को बचाया जा सकता है.