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Property Buying Tips: इन दिनों अवैध कॉलोनियों और विवादित प्लॉट की भरमार है. बिना पूरी जांच-पड़ताल के जमीन खरीदना न सिर्फ आपके पैसों को खतरे में डाल सकता है. जिले में कई ऐसी संपत्तियां बिक रही हैं, जिनका स्वामित्व, नक्शा या रजिस्ट्री पूरी तरह क्लियर नहीं होती है. बाद में इन्हीं खामियों के कारण खरीदारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं. (रिपोर्ट:राकेश पटेल/सीधी)
सीधी जिले में प्लॉट खरीद कर अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए यह खबर बेहद जरूरी है. जिले में इन दिनों अवैध कॉलोनियों और विवादित प्लॉट की भरमार है. बिना पूरी जांच-पड़ताल के जमीन खरीदना न सिर्फ आपके पैसों को खतरे में डाल सकता है.

जिले में कई ऐसी संपत्तियां बिक रही हैं, जिनका स्वामित्व, नक्शा या रजिस्ट्री पूरी तरह क्लियर नहीं होती है. बाद में इन्हीं खामियों के कारण खरीदारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं. प्रॉपर्टी खरीदते समय सबसे पहले विक्रेता से जमीन की पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी जरूर मांग लेना चाहिए, यह जांचें कि सभी रजिस्ट्री एक-दूसरे से क्लियर हो रही हैं या नहीं.

जमीन बेचने वाले का पहचान पत्र लें और उसे दस्तावेजों से मिलान करें. अगर जमीन पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेची जा रही है, तो उसकी वैध कॉपी लेना भी जरूरी है.जीस प्लॉट को आप खरीद रहे हैं, उसका पूरा रिकॉर्ड खंगालना बेहद अहम है. अगर जमीन कृषि की है, तो उसके दस्तावेज राज्य सरकार के राजस्व विभाग में उपलब्ध होते हैं.
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जमीन का खसरा नंबर जरूर पता करें, क्योंकि इसी नंबर से प्लॉट से जुड़ी पूरी जानकारी मिल जाती है. वहीं, अगर आप मकान बनाने के लिए प्लॉट ले रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि वहां रेसिडेंशियल परमिशन है. कमर्शियल या इंडस्ट्रियल जमीन पर घर बनाना अवैध होता है.

सिविल इंजीनियर देवदत्त शुक्ला ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि नया प्लॉट खरीदने से पहले उसकी प्लॉटिंग और लेआउट की जांच बेहद जरूरी है. हर कॉलोनी का अलग नक्शा होता है और वह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) से अनुमोदित होना चाहिए.

TNCP अप्रूवल मिलने पर ही कॉलोनी को कानूनी माना जाता है. इससे सड़क, पानी, सीवेज और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित होती हैं. बिना TNCP के परमिशन के प्लॉट पर निर्माण करना अवैध हो सकता है.

इसके अलावा यह भी जांचें कि नगर निगम या स्थानीय निकाय से नक्शा पास है या नहीं. केवल रजिस्ट्री हो जाने से प्लॉट वैध हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. इंजीनियर का कहना है कि रजिस्ट्री के समय रजिस्टर्ड अधिकारी केवल राजस्व के नजरिए से जांच करता है. प्रॉपर्टी कानूनी है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह खरीदार की होती है.

खरीद से पहले अखबार में सार्वजनिक सूचना देना भी जरूरी माना जाता है. इससे आने वाले समय में किसी विवाद की स्थिति में आपका पक्ष मजबूत रहता है. साथ ही एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं. जमीन की आरओआर और अन्य जानकारी के लिए एमपी किसान ऐप का सहारा लिया जा सकता है.