नीमच जिले में मृत पशुओं के शवों के निस्तारण में गंभीर अव्यवस्था, अवैध वसूली और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। इसी संबंध में सर्व हिंदू संगठनों ने मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा है। संगठनों ने इस मामल
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ज्ञापन में बताया गया है कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मृत पशुओं के शव उठाने और उनके निस्तारण के लिए शासन स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। आरोप है कि पूर्व में इस कार्य के शासकीय ठेके जिनके पास थे, वही लोग अब भी मनमाने ढंग से मृत पशुओं के शव उठा रहे हैं।
इन लोगों पर गरीब पशुपालकों और गोशाला संचालकों से अवैध रूप से पैसे मांगने का आरोप है। पशु की मृत्यु से पहले ही आर्थिक संकट झेल रहे पशुपालकों पर यह अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। कई मामलों में मांग पूरी न होने पर मृत पशुओं के शव कई दिनों तक नहीं उठाए जाते, जिससे संबंधित क्षेत्रों में गंदगी और दुर्गंध फैल रही है।
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि मृत पशुओं के निस्तारण के नाम पर नियमों का उल्लंघन करते हुए उनकी खाल उतारी जा रही है। साथ ही, मांस, हड्डियों और अन्य अंगों को अवैध रूप से संग्रहित कर बेचा जा रहा है। मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (मृत शरीरों, शवों और अन्य आपत्तिजनक पदार्थों के निपटान के स्थानों को विनियमित करने संबंधी) नियम 1998 के तहत केवल निर्धारित शुल्क लेकर पशुओं को दफनाने का प्रावधान है, न कि उनके अंगों के व्यापार का।
ज्ञापन में रामनगर तहसील के जीरन क्षेत्र में मृत पशुओं की खाल उतारने, हड्डियों व मांस के अवैध परिवहन और विक्रय के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। संगठनों का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने से बचता रहा है। इससे आमजन में आक्रोश और असंतोष बढ़ रहा है।
सर्व हिंदू संगठनों ने मांग की है कि अवैध ठेके तत्काल निरस्त किए जाएं। मृत पशुओं के निस्तारण हेतु नियमों के अनुसार पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। अवैध वसूली बंद हो और पशु अंगों के अवैध व्यापार तथा परिवहन में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
