सैकड़ों वर्ष पुरानी बाजार के नाम की कहानी, कभी होता था खटाई का व्यापार

सैकड़ों वर्ष पुरानी बाजार के नाम की कहानी, कभी होता था खटाई का व्यापार


रीवाः रीवा की खटकाहाई बाजार सैकड़ो वर्ष पुरानी है. इस बाजार में इंसान की जरूरत की हर सामग्री मिल जाती है. इस मार्केट में सालों पुरानी दुकानें है. यह मार्केट फोर्ट रोड के बगल में स्थित है. इस बाजार को ग्रामीणों का बाजार भी कहा जाता है, क्योंकि गांवों से आने वाले लोग ज्यादातर किसान परिवार के होते है. ऐसे में उनके बजट के हिसाब से सामान उपलब्ध होता है.

कम बजट में मिल जाता है सामान

इस मार्केट का उद्देश्य यही है कि लोगों को छोटी-मोटी चीजों के लिए भी परेशान न होना पड़े. बाकायदा दुकानों में शादी-ब्याह की जरूरत के सभी सामान मिल जाते हैं. रीवा का यह मार्केट फोर्ट रोड के बगल में स्थित है. इस मार्केट में तकरीबन पचास की संख्या में ऐसी दुकानें हैं, जहां श्रृंगार के सभी सामान मिलते हैं. ऐसे ही दुकाने होंगी जहां कपडे़ कम बजट में मिल जाते हैं. इस मार्केट में सालों पुरानी दुकानें है. जिले भर से लोग यहां शादी-ब्याह जरूरी सामान की खरीदी करने के लिए आते हैं.

रीवा के इस बाजार में स्थित सैकड़ों वर्ष पुरानी इन दुकानों में इतने आइटम हैं. आप गिनते-गिनते थक जाएंगे. लेकिन दुकान के सारे आइटम नहीं गिन पाएंगे. कई दुकानों पर जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कारों के अलावा दैनिक पूजा पाठ की सारी सामग्री मिलती है. इन पूजा में सर्व ग्रह शांति का पाठ हो या फिर किसी भी मंदिर या मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हो सभी उपयोगी सामान मिल जाता है.

ग्रामीणो का बाजार कहा जाता है

इस बाजार को ग्रामीणों का बाजार कहां जाता है, क्योंकि शहर के लोग तो यहां हर रोज आते ही है लेकिन गांव में अगर शादी-ब्याह का आयोजन होता है तो वो यहीं आकर अपनी शारी खरीदी करते हैं. बगल में रीवा की पुरानी सब्जी मंडी है जहां ताजी सब्जिया बड़े आराम से मिल जाती हैं. कुछ ऐसी दुकाने हैं जहां किराना मिल जाता है. कुछ दुकाने है जहां राशन मिल जाता है. इसलिए लोग यहां आकर खरीदी करना बेहद पसंद करते हैं. खटकाहाई बाजार में सस्ते और मंहगे कपडे दोनो तरह के उपलब्ध होते हैं, अच्छी बात यह है कि क्वलिटी में कम्प्रोमाइज नहीं करना पड़ता है. लोगों को एक जगह पहुंच कर सारी चीजें उपलब्ध होती हैं.

बाजार का नाम पड़ा खटकाहाई

रीवा के खटकाहाई बाजार के नाम की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है यहां बिसात खाने की दुकान चलाने वाले सुंदरलाल बताते हैं कि इस बाजार में पहले खटिक जाति के लोग रह कर खटाई का व्यापार किया करते थे, खटाई के बदले वो पैसे नहीं लेते थे बल्कि अपनी जरूरत का समान लिया करते थे. धीरे-धीरे यहां सभी तरह के सामान का लेन देन करके व्यापारी आकर व्यापार करने लगे. ये बाजार रीवा के बघेल राजवंश के जमाने में भी हुआ करता था. खटिको के खटाई व्यापार करने के कारण इस बाजार का नाम खटकाहाई पड़ा है.



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