स्वयं सहायता समूह से लिया ट्रेनिंग, फिर शुरू किया झाड़ू, टोपी बनाने का बिजनेस

स्वयं सहायता समूह से लिया ट्रेनिंग, फिर शुरू किया झाड़ू, टोपी बनाने का बिजनेस


Last Updated:

Burhanpur news: पहले ग्रहणी थी कोई काम नहीं था लेकिन जब मुझे स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यह जानकारी लगी तो मैंने प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब मैं अपने घर पर ही केले के रेशे की टोपियां और झाड़ू और कई प्रकार के प्रोडक्ट बनाकर बेचती हूं.

ख़बरें फटाफट

बुरहानपुरः एमपी के बुरहानपुर के छोटे से गांव में रहने वाली महिला की टोपी झाड़ू ने बदल दी जिंदगी. रोजगार स्थापित करने के लिए महिलाओं को काफी जद्दों जहद करना पड़ती थी लेकिन सरकार ने सरल नीति और सरल तरीके से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया. अब बसाड़ में रहने वाली ज्योति चौधरी पिछले तीन वर्षों से केले के रेशे की टोपियां और झाड़ू सहित कई प्रकार के प्रोडक्ट तैयार कर रही है. जिससे महिला हर साल दो से तीन लाख रुपए की कमाई कर लेती है.

महिला का कहना है कि मैं पहले ग्रहणी थी कोई काम नहीं था लेकिन जब प्रशिक्षण प्राप्त किया तो में आत्मनिर्भर बन गई हु गांव की पांच महिलाओं को रोजगार भी दे रही हु. महिला के द्वारा बनाए जाने वाली केले के रेशे की टोपियां और झाड़ू की डिमांड देश विदेश तक है. यह महिला एक टोपी ₹500 में बेचती है तो झाड़ू 300 से ₹400 में बेच रही है.

स्वयं सहायता समूह ने बदल दी जिंदगी

लोकल 18 की टीम को बसाड़ में रहने वाली ज्योति चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले मैं ग्रहणी थी कोई काम नहीं था लेकिन जब मुझे स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यह जानकारी लगी तो मैंने प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब मैं अपने घर पर ही केले के रेशे की टोपियां और झाड़ू और कई प्रकार के प्रोडक्ट बनाकर बेचती हूं. जिससे मेरी अच्छी कमाई होती है मेरे हाथ से जो प्रोडक्ट बनाए जाते हैं वह मशीन से बनने वाले प्रॉडक्ट्स से भी काफी अच्छे दिखते हैं. इसलिए लोगों को हाथों की कलाकारी पसंद आती है. लोग ऑर्डर देकर मुझसे यह प्रोडक्ट बनवाते हैं.

चार महिलाओं को दिया है रोजगार

ज्योति चौधरी का कहना है कि पहले मुझे भी रोजगार नहीं मिल पाता था लेकिन मैं जब से प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1 साल से अब मैं चार महिलाओं को गांव में रोजगार दे रही हूं. यह महिलाएं केले के रेशे से टोपी और झाड़ू मोबाइल कवर और खेल खिलौने बनाने का काम करती हैं. मेरे यहां की टोपियां देश-विदेश तक जाने लगी है. ऑर्डर जिस तरह से मिलते हैं उस तरह से हम महिलाओं को काम देकर यह बनवा रहे हैं.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

homemadhya-pradesh

स्वयं सहायता समूह से लिया ट्रेनिंग, फिर शुरू किया झाड़ू, टोपी बनाने का बिजनेस



Source link