Rewa News: मध्य भारत की धरती पर फैली विंध्याचल पर्वत श्रृंखला केवल पहाड़ों का समूह नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, प्रकृति और पौराणिक कथाओं का जीवंत संगम है. इसी विंध्याचल की गोद में बसा है रीवा, जो अपनी घाटियों, झरनों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में पहचान रखता है.
रीवा के पर्यावरणविद डॉ. मुकेश एंगल बताते हैं कि विंध्याचल पर्वत न सिर्फ भौगोलिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक और पारिस्थितिक दृष्टि से भी भारत की सबसे अहम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है. यही पर्वत रीवा को उसकी पहचान, पानी, हरियाली और प्राकृतिक संतुलन देता है.
क्या है विंध्याचल पर्वत श्रृंखला
विंध्याचल पर्वत या विंध्यन पर्वतश्रेणी पहाड़ियों की एक टूटी-फूटी लेकिन विशाल श्रृंखला है, जो भारत की मध्यवर्ती उच्च भूमि का दक्षिणी कगार बनाती है. यह पश्चिम में गुजरात से शुरू होकर लगभग 1,086 किलोमीटर तक फैली हुई है और मध्य प्रदेश को पार करते हुए वाराणसी की गंगा घाटी से मिलती है.
यह पर्वतश्रेणी मालवा पठार का दक्षिणी छोर बनाती है और आगे चलकर दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है कैमूर श्रेणी, जो सोन नदी के उत्तर से पश्चिमी बिहार तक फैली है. दक्षिणी शाखा, जो मैकल श्रेणी (अमरकंटक पठार) के रूप में सतपुड़ा पर्वतश्रेणी से मिलती है. भौगोलिक रूप से विंध्याचल उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच एक प्राकृतिक सीमा रेखा मानी जाती है.
नदियों का उद्गम और प्राकृतिक स्वरूप
विंध्याचल पर्वतमाला की ऊंचाई लगभग 1,500 से 3,500 फीट (450–1100 मीटर) तक है. इसकी क्षैतिज बलुआ पत्थर संरचना के कारण ये पर्वत ऊपर से सपाट और पठारी नजर आते हैं. यहीं से चंबल, बेतवा, केन और टोंस जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम होता है, जो आगे चलकर गंगा-यमुना नदी प्रणाली को जीवन देती हैं. दूसरी शताब्दी में यूनानी भूगोलवेत्ता टॉलेमी ने इस पर्वतमाला को Vindias नाम दिया था.
वेदों से पुराणों तक विंध्याचल
विंध्याचल पर्वत प्राचीन भारत के सप्तकुल पर्वतों में से एक माना गया है. ‘विंध्य’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘विध्’ धातु से मानी जाती है, जिसका अर्थ है भूमि को भेदना. वेद, महाभारत, रामायण और पुराणों में विंध्याचल का अनेक स्थानों पर उल्लेख मिलता है.
अगस्त्य मुनि और विंध्याचल की पौराणिक कथा
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब अगस्त्य मुनि दक्षिण की ओर जाने लगे तो विंध्याचल पर्वत उनके सामने आ गया. गुरु के सम्मान में विंध्याचल झुक गया. अगस्त्य मुनि ने आदेश दिया कि जब तक वे दक्षिण से वापस न लौटें, तब तक पर्वत झुका ही रहे. कहा जाता है कि अगस्त्य मुनि कभी लौटे नहीं और विंध्याचल आज भी उनके आदेश की प्रतीक्षा में झुका हुआ है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यही कारण है कि विंध्य क्षेत्र के लोग आज भी विनम्र, शालीन और बेहद मिलनसार माने जाते हैं.
रीवा है प्रकृति और इतिहास का अनूठा संगम
रीवा विंध्याचल की गोद में बसा ऐसा क्षेत्र है, जहां क्योटी और पूर्वा जैसे झरने, देउर कोठार स्तूप, घने वन, पठारी मैदान और सफेद बाघों का इतिहास जुड़ा है. यही वजह है कि रीवा को पर्यटन, पर्यावरण और विरासत तीनों का केंद्र माना जाता है.
अरावली और विंध्य हैं भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाएं
अरावली और विंध्याचल भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में गिनी जाती हैं. जहां अरावली आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, वहीं विंध्याचल आज भी मध्य भारत के प्राकृतिक संतुलन को संभाले हुए है. अरावली पर्वतमाला लगभग 250 करोड़ साल पुरानी मानी जाती है. इसका सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर (माउंट आबू) आज भी इसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहता है. जब हिमालय का जन्म भी नहीं हुआ था, तब अरावली की चोटियां आसमान छूती थीं.