बैगाओं के लिए फरिश्ता बने IAS…अब सेवा ही नहीं रोजगार भी देंगे, जानिए संगठन की कहानी 

बैगाओं के लिए फरिश्ता बने IAS…अब सेवा ही नहीं रोजगार भी देंगे, जानिए संगठन की कहानी 


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Balaghat News: बालाघाट के आदिवासी और बैगा समुदाय के लिए 13 सालों से काम कर रही प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन की कहानी, जो नक्सल प्रभावित गांवों में ठंड, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की लड़ाई लड़ रही है.

बालाघाट जिला एक आदिवासी बहुल जिला है, जहां पर खास तौर से गोंड और बैगा आदिवासी बसे हुए हैं. इसमें भी खास तौर से अति पिछड़ी हुई जनजाति है बैगा, जिन्हें आज तक मुख्य धारा तक नहीं जोड़ा जा सका है. ऐसे में ये समुदाय बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रहा है. लेकिन एक ऐसी संस्था है, जो एक दशक से आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने और कुछ सहायता पहुंचाने का काम करता है. संस्था का नाम नाम है प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन, जो हर साल ठंड के दिनों में आदिवासी अंचलों के अति पिछड़े गांवों को चिह्नित करता है और वहां पर एक कैंप आयोजित कर ग्रामीण अंचलों की समस्याएं सुनता है और उनकी समस्याओं के निवारण के लिए काम करता है. जानिए संगठन की पूरी कहानी…

जानिए क्या है संगठन
बालाघाट के बोरी गांव में जन्में 1995 बैच के आईएएस अफसर मुकेश मेश्राम ने प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन की स्थापना 13 साल पहले की थी. वह भी गरीब परिवार से आते थे. उनकी मां मेहनत मजदूरी कर उनकी पढ़ाई करवाई थी. ऐसे में जिस तरह अभाव में उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया. इसलिए वह गरीबी का दर्द समझते हैं. इसलिए उन्होंने संगठन की स्थापना की और 13 सालों से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की मदद करने की ठानी और बालाघाट में उनका संगठन लगातार अलग-अलग तरीके से काम कर रहा है.

आदिवासी बहुल गांवों में हर दिन पहुंचाते सामग्री
प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन के सचिव महेंद्र मेश्राम ने संगठन की जानकारी देते हुए बताया कि बालाघाट में संगठन लगातार सक्रिय रहता है. इसमें फाउंडेशन की टीम ठंड के मौसम में अलग-अलग गांवों का दौरा करती है. इस साल संगठन ने आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में जाकर गर्म कपड़े और बच्चों के लिए कपड़े वितरित किए. इसमें कभी अति नक्सल प्रभावित गांव कसंगी, कुआगोंदी, चितालखोली, केरीकोना, झाको, लहंगाकन्हार, मुरकुत्ता, चिखली, कोडबीकोना, घुम्मुर सहित कई गांवों का दौरा कर कैंप आयोजित किया. इस साल फाउंडेशन की टीम ने 1000 से ज्यादा कंबल वितरित किए और सैकड़ों बच्चों को कपड़े भी दिए.

संगठन से जुड़े रफी अंसारी वरिष्ठ पत्रकार है. वह बताते हैं कि वह भी संगठन से करीब 13 सालों से जुड़े हुए है. ऐसे में संगठन में तमाम पत्रकार भी साथ जाते है और उन गांवों की समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने नजरअंदाज किए समुदाय के अधिकारों की आवाज को उठाया और अब इसके कई सकारात्मक परिणाम भी सामने आए है.

अब आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी 
संगठन के सचिव महेंद्र मेश्राम ने जानकारी देते हुए बताया कि अब वह ग्रामीण अंचलों में विधवा और बेसहारा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीन और इसके लिए ट्रेनिंग भी देंगे. इसके अलावा ग्रामीण अंचल में जमनापारी सहित अन्य पशुओं के वितरण की योजना बनाई गई है. वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय आगे बढ़ सके इसके लिए संगठन जागरूकता के भी काम करता है. इसके अलावा बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करने का भी काम संगठन 13 सालों से कर रहा है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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