मोहन ढाकले/बुरहानपुर: सरकारी नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं होता, लेकिन अगर हौसला, मेहनत और सही सोच हो तो खेती भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकती है. बुरहानपुर जिले के लालबाग क्षेत्र में रहने वाले किसान देवीदास ने यही कर दिखाया है. ताप्ती मिल की सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने खेती को अपनाया और आज 71 साल की उम्र में भी हर साल 5 से 6 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं.
मिल की नौकरी छोड़ी, खेती को बनाया भविष्य
किसान देवीदास बताते हैं कि वह पहले बुरहानपुर की ताप्ती मिल में सरकारी नौकरी करते थे. नौकरी तो सरकारी थी, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलता था. इसी परेशानी ने उन्हें बड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया. उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह खेती-किसानी में उतर गए. शुरुआती दौर आसान नहीं था. पहले खेती से खास कमाई नहीं होती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार खेती में नए प्रयोग करते रहे.
नवाचार और तकनीक से बदली किस्मत
देवीदास बताते हैं कि वह पिछले करीब 50 सालों से खेती कर रहे हैं. आज उनके पास साढ़े चार एकड़ जमीन है, जिसमें वह गेहूं, केला, कपास, मक्का और तुवर जैसी फसलों की खेती करते हैं. उन्होंने खेती में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई तकनीक को अपनाया. कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों की सलाह लेकर समय पर सिंचाई, खाद और फसल प्रबंधन किया. इसका नतीजा यह हुआ कि उत्पादन बढ़ा और लागत कम रही.
कम लागत, ज्यादा उत्पादन बना सफलता की कुंजी
किसान देवीदास का कहना है कि सही समय पर सिंचाई और संतुलित खाद का उपयोग करने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. जब उत्पादन अच्छा होता है, तो बाजार में भी सही दाम मिलते हैं. यही वजह है कि आज वह हर साल 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं. उन्होंने बताया कि अभी फिलहाल उनके खेत में गेहूं और मक्का की फसल लगी है, जबकि आने वाले समय में अन्य फसलों की भी योजना है.
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
देवीदास की खेती देखकर आसपास के किसान भी उनसे मिलने आते हैं और खेती के तरीके समझते हैं. वह खुशी-खुशी अपने अनुभव साझा करते हैं. 71 साल की उम्र में भी उनका जोश देखते ही बनता है. देवीदास बताते हैं कि उन्होंने करीब 20 साल की उम्र में खेती शुरू की थी और आज भी खेती को ही अपनी ताकत मानते हैं.
किसानों के लिए संदेश
किसान देवीदास का कहना है कि अगर किसान नई तकनीक अपनाएं, विशेषज्ञों की सलाह लें और समय पर फसल की देखभाल करें, तो खेती कभी घाटे का सौदा नहीं होती. सही मेहनत और समझदारी से खेती भी सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बन सकती है.