निवाड़ी जिले के ओरछा में मध्य प्रदेश पटवारी संघ की प्रांतीय बैठक आयोजित की गई। इसमें पटवारियों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग को दोहराते हुए ग्रेड-पे बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार की।
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बैठक में मुख्य रूप से 1998 से मिल रहे 2100 रुपए के ग्रेड-पे का मुद्दा उठा। संघ का कहना है कि पिछले 27 वर्षों से वेतनमान में कोई सुधार नहीं हुआ है, जबकि पटवारियों पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड से लेकर आपदा प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के सर्वे की पूरी जिम्मेदारी पटवारियों पर है, लेकिन उनका वेतन अब भी पुराने स्तर पर ही बना हुआ है।
मुख्यमंत्री से सीधी चर्चा की तैयारी
प्रांत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी संभागाध्यक्ष और जिला अध्यक्ष शामिल हुए। संघ ने निर्णय लिया है कि आगामी माह में प्रस्तावित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। मुख्यमंत्री ने संघ को मिलने का समय दिया है, जिसमें ग्रेड-पे बढ़ाने और वेतनमान में सुधार पर सीधी बात की जाएगी।
बैठक में जिलेभर के पटवारी शामिल रहे।
प्रदेश स्तर पर एकजुटता
निवाड़ी जिला अध्यक्ष भगवत दांगी ने बताया कि यह मांग पूरे मध्य प्रदेश के हजारों पटवारियों के हितों से जुड़ी है। संघ ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और शासन से न्यायसंगत सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। ओरछा की इस बैठक में आगामी आंदोलन या चर्चा की रूपरेखा पर सभी पदाधिकारियों ने अपनी सहमति दी।
क्या होता है ग्रेड पे
यह मूल वेतन के ऊपर एक तय राशि होती है, जो पद के अनुसार अलग-अलग होती है। यदि किसी क्लर्क का मूल वेतन ₹18,000 है और उसका ग्रेड पे ₹2,800 है, तो उसका कुल वेतन (भत्तों से पहले) ₹20,800 (₹18,000 + ₹2,800) होगा।