Last Updated:
Satna News: बेहतर रिस्पॉन्स मिलने के बाद सतना में एक बड़ा कलेक्शन सेंटर भी शुरू किया गया. आज स्थिति यह है कि जम्बूद्वीप रीसायकल अब तक घरों और दुकानों से एक लाख किलो से ज्यादा कचरा जमा कर चुका है.
सतना. कूड़े के पहाड़ अक्सर शहरी विकास की कड़वी सच्चाई सामने रखते हैं लेकिन इन्हीं पहाड़ों को देखकर अगर किसी के मन में समाधान का बीज अंकुरित हो जाए, तो वह सोच समाज के लिए मिसाल बन जाती है. मध्य प्रदेश के सतना के एक युवक ने ठीक यही किया. जिस समस्या को लोग अनदेखा कर देते हैं, उसी कचरे को अवसर में बदलते हुए उन्होंने जम्बूद्वीप रीसायकल नाम का स्टार्टअप खड़ा किया. आज यह स्टार्टअप न सिर्फ सतना को साफ रखने में भूमिका निभा रहा है बल्कि लोगों को उनके ही घर के कचरे से कमाई का रास्ता भी दिखा रहा है. लोकल 18 से बातचीत में अनिल प्रजापति बताते हैं कि दिल्ली में नौकरी के दौरान उनका रोजाना गाजीपुर स्थित कूड़े के पहाड़ के पास से आना-जाना होता था. वहां फैला कचरा और उससे उठती बदबू उन्हें लगातार सोचने पर मजबूर करती थी कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो छोटे शहर भी इसी राह पर चल पड़ेंगे. यही चिंता उनके मन में बैठ गई कि सतना जैसे शहर को इस हालात तक पहुंचने से पहले कुछ किया जाना चाहिए.
छोटी शुरुआत और बड़ा विजन
उन्होंने आगे बताया कि इसी सोच के साथ सतना में एक छोटे से रद्दी कलेक्शन सेंटर से जम्बूद्वीप रीसायकल की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और स्टार्टअप को सतना इनक्यूबेशन सेंटर में जगह मिली. बेहतर रिस्पॉन्स मिलने पर एक बड़ा कलेक्शन सेंटर भी शुरू किया गया. आज स्थिति यह है कि जम्बूद्वीप अब तक घरों और दुकानों से एक लाख किलो से अधिक कचरा इकट्ठा कर चुका है.
कचरे से कमाई और रोजगार
अनिल प्रजापति बताते हैं कि इस पहल की सबसे बड़ी खासियत है फ्री डोर-टू-डोर पिकअप और तय रेट. पेपर वेस्ट पर 9–10 रुपये प्रति किलो, आयरन वेस्ट पर 20–25 रुपये प्रति किलो जैसे दाम तय हैं. वहीं टेक्सटाइल वेस्ट, पुराने कपड़े, हेयर वेस्ट, टायर वेस्ट और अन्य वेस्ट के भी अलग-अलग रेट हैं. अब तक इस सिस्टम के जरिए सतना के लोग 20 से 25 लाख रुपये तक की कमाई कर चुके हैं. शुरुआत में यह काम एक व्यक्ति संभाल रहा था लेकिन आज पांच लोगों की टीम नियमित रूप से काम कर रही है.
सतना से देश-दुनिया तक रीसायकल का सपना
उन्होंने आगे बताया कि अब इस टीम का विजन सिर्फ सतना तक सीमित नहीं है. उनका मानना है कि भारत में फिलहाल सिर्फ 7 प्रतिशत कचरे का ही रीसायकल हो पा रहा है, जिसे वह भविष्य में 50 प्रतिशत तक ले जाना चाहते हैं. उनका लक्ष्य है कि पहले सतना फिर मध्य प्रदेश उसके बाद पूरा देश और अंत में वैश्विक स्तर पर रीसायकल सिस्टम को मजबूत करना है.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.