इस कुंड में डुबकी मतलब चर्मरोगों की छुट्टी! रहस्य से भरा बालाघाट का भोंगाद्वार

इस कुंड में डुबकी मतलब चर्मरोगों की छुट्टी! रहस्य से भरा बालाघाट का भोंगाद्वार


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Balaghat News: गांव के ही एक शख्स ने दावा किया कि अगर किसी व्यक्ति को चर्मरोग हो, तो भोंगाद्वार कुंड में नहाने से बीमारी से मुक्ति मिल जाती है. भोंगाद्वार कुंड का पानी इतना चमत्कारी है कि किसी को दाद-खाज, खुजली या फिर फोड़े-फुंसी हों, तो कुंड में नहाने से ये रोग दूर हो जाते हैं.

बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में घने जंगल और सतपुड़ा की घनी पहाड़ियां हैं. ऐसे में बालाघाट में प्रकृति जीवंत उदाहरण देखने को मिलता है. यहां के घने जंगल और पहाड़ कई सुंदर झरनों का निर्माण करते हैं, जो देखने में जितने आकर्षक लगते हैं, उतने ही हैरान करने वाले हैं. एक ऐसा ही स्थान बालाघाट के इलाकों में है, जहां पर झरना तो है ही है लेकिन उसके ऊपर एक प्राकृतिक पुल भी है. इसे लेकर ग्रामीणों में कई मान्यताएं हैं. आज हम आपको ऐसे ही हैरान करने वाली एक संरचना के बारे में बता रहे हैं. दरअसल बालाघाट के घूम्मुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव का नाम भोंगाद्वार है. इसी गांव में एक ऐसा प्राकृतिक स्थल है, जहां देखने पर हर कोई हैरान रह जाता है. लोकल 18 को ग्रामीणों ने उस स्थान के बारे ऐसी बातें बताईं, जिसपर यकीन करना 21वीं सदी में मुश्किल हो जाता है. बालाघाट से 100 किलोमीटर दूर सतपुड़ा की पहाड़ियों से झरना निकलता है, जिसे भोंगाद्वार के नाम से जाना जाता है और उसी नाम से ही गांव का नाम पड़ा भोंगाद्वार, जानते हैं इसकी पूरी कहानी.

गांव के सरपंच ने लोकल 18 को बताया कि भोंगाद्वार का निर्माण उनके ईष्टदेवता भीमसेन ने प्राचीन युग में करवाया था. ऐसी मान्यता है कि यह एक रात में निर्मित हुआ. इसे बनाते-बनाते सुबह हो गई और वह अधूरा रहा गया. वह चूने के पत्थर से बना हुआ लगता है. वहां पर भीमसेन देव की पूजा की जाती है. आसपास के इलाके लोग यहां पर अब भी जाते हैं और श्रद्धा से पूजा अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां पर मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. मन्नत पूरी होने पर लोग कुंड के आगे कुछ ही दूरी पर बकरा या मुर्गे की बलि देते हैं.

भोंगाद्वार कुंड का चमत्कारी पानी
गांव के ही एक शख्स ने दावा किया है कि अगर किसी भी प्रकार का चर्मरोग है, तो भोंगाद्वार कुंड में नहाने से वह दूर हो जाता है. भोंगाद्वार कुंड का पानी इतना चमत्कारी है कि किसी को दाद-खाज, खुजली या फिर फोड़े-फुंसी हों, तो उस कुंड में नहाने से ये विकार दूर हो जाते हैं. ऐसी भी मान्यता है कि यह काम सिर्फ बुधवार और रविवार को ही करना चाहिए. बाकी दिनों में यह प्रक्रिया करने से कोई लाभ नहीं होता है. वहीं अगर किसी को संतान प्राप्ति नहीं होती, तब भी इस कुंड में नहाने से यह मनोकामना पूरी हो जाती है. लोकल 18 उनके दावे की पुष्टि नहीं करता है.

अब पर्यटन स्थल बनाने की मांग
गांव के सरपंच ने आगे बताया कि प्रकृति के चमत्कार को दुनिया देखे, इसलिए कई बार मांग की जा चुकी है कि इस जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में घोषित किया जाए लेकिन यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है. वहीं यहां पर बुनियादी विकास कार्य किए जाने की भी मांग है. उनका कहना है कि अगर इस इलाके में पर्यटन बढ़ेगा, तो स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. सरकार को उनकी मांग सुननी चाहिए और भोंगाद्वार को पर्यटन क्षेत्र घोषित करना चाहिए.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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इस कुंड में डुबकी मतलब चर्मरोगों की छुट्टी! रहस्य से भरा बालाघाट का भोंगाद्वार

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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