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Ujjain News: महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह दर्शन और जलाभिषेक की वर्तमान व्यवस्था पर सांसद अनिल फिरोजिया ने सवाल उठाया कि पहले स्थानीय श्रद्धालु आसानी से गर्भगृह में जाकर महाकाल को जल अर्पित कर पाते थे, लेकिन अब आम भक्त, खासकर बुजुर्ग, इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. क्या है पूरा मामला, जानिए
Ujjain News: महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह दर्शन और जलाभिषेक की वर्तमान व्यवस्था को लेकर आलोट सांसद अनिल फिरोजिया ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. उन्होंने दिशा समिति की बैठक में मंदिर प्रशासन की इस नीति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले स्थानीय श्रद्धालु आसानी से गर्भगृह में जाकर महाकाल को जल अर्पित कर पाते थे, लेकिन अब आम भक्तों, खासकर बुजुर्गों को इस सुविधा से वंचित किया जा रहा है. सांसद ने अपने बयान में अपनी 85 वर्षीय मां का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि उनकी मां पिछले लगभग 60 वर्षों से हर सोमवार महाकाल को जल चढ़ाती रही हैं. हाल ही में उनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर होने के बावजूद वे दर्शन के लिए मंदिर पहुंचती हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन्हें गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है. मजबूरी में उन्हें बाहर से ही पंडित को जल सौंपकर लौटना पड़ता है.
बुजुर्ग श्रद्धालु को दर्शन में परेशानी
अनिल फिरोजिया ने कहा कि अगर उनकी मां जैसी बुजुर्ग श्रद्धालु को दर्शन में परेशानी हो रही है, तो हजारों अन्य वृद्ध और असहाय भक्तों की स्थिति आसानी से समझी जा सकती है. उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि महाकाल मंदिर में प्रतिदिन कम से कम दो घंटे का समय तय किया जाए, जिसमें सामान्य श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश कर खुद जलाभिषेक कर सकें. सांसद ने साफ किया कि भगवान के दरबार में कोई वीवीआईपी नहीं होता है-राजा हो या आम नागरिक, सभी समान हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुछ विशेष लोगों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति मिल सकती है, तो आम श्रद्धालु क्यों वंचित रहें. उन्होंने यह भी कहा कि पर्वों या अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में दर्शन सीमित किए जा सकते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में कम से कम दो घंटे का स्लॉट निश्चित होना चाहिए.
लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ी
अनिल फिरोजिया ने कहा कि इस मांग का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ी है, जिनकी जीवन भर की इच्छा होती है कि वे खुद महाकाल को जल अर्पित कर सकें. उन्होंने यह भी बताया कि कलेक्टर ने इस प्रस्ताव पर विचार करने का भरोसा दिया है और वे इसे मुख्यमंत्री के सामने भी रखेंगे. सांसद ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि मंदिर प्रशासन को श्रद्धालुओं के अनुभव और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बदलाव करना चाहिए. उनका मानना है कि उचित व्यवस्था और समय स्लॉट निर्धारित करने से बुजुर्ग और असहाय श्रद्धालु भी श्रद्धा भाव से महाकाल का जलाभिषेक कर सकेंगे, जिससे मंदिर दर्शन सभी के लिए सुलभ और समान हो जाएगा.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें