सतना की खुशबू ने दिखाया हुनर, मिनिएचर आर्ट से मिली देश-विदेश में पहचान

सतना की खुशबू ने दिखाया हुनर, मिनिएचर आर्ट से मिली देश-विदेश में पहचान


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Satna News: खुशबू ताम्रकार ने लोकल 18 से कहा कि यह ऐसा काम है, जिसे महिलाएं घर बैठे अपने फ्री टाइम में भी कर सकती हैं. इसमें समय की कोई बंदिश नहीं है और मेहनत के हिसाब से इनकम भी अच्छी हो जाती है.

सतना. सपनों को आकार देने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि मजबूत इरादों और रचनात्मक सोच की जरूरत होती है.मध्य प्रदेश के सतना जिले की खुशबू ताम्रकार ने इसी सोच को सच कर दिखाया है. घर में उपलब्ध साधारण संसाधनों से खुद तैयार की गई क्ले से मिनिएचर आर्ट बनाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि इसे आजीविका का मजबूत जरिया भी बना लिया. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उनके बनाए छोटे-छोटे लेकिन बेहद बारीक आर्ट पीस आज देश विदेश तक पहुंच रहे हैं. खुशबू का यह सफर किसी बड़े स्टूडियो या महंगे उपकरणों से नहीं बल्कि घर के एक छोटे से कोने से शुरू हुआ.

उन्होंने लोकल 18 से कहा कि शुरुआत में संसाधन बेहद सीमित थे लेकिन सीखने की लगन और प्रयोग करने का हौसला हमेशा बना रहा. धीरे-धीरे वह घर पर ही क्ले तैयार करने लगीं और उसी से मिनिएचर स्ट्रक्चर बनाने लगीं. इस क्ले को बनाने के लिए अरोरा यानी बारीक थर्माकोल और फेविकोल को अच्छे से मिक्स किया जाता है. इस क्ले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जल्दी सूखती नहीं और टूटती भी नहीं है. इसी वजह से इससे बनाए गए मिनिएचर लंबे समय तक टिकाऊ रहते हैं और ग्राहकों को भी खूब पसंद आते हैं.

मिनिएचर आर्ट से बने उपयोगी प्रोडक्ट्स
उन्होंने कहा कि वह इस खास क्ले से खुशबू नेम प्लेट, वॉल हैंगिंग, फोटो फ्रेम, क्लॉक और कई तरह के डेकोरेटिव आइटम तैयार करती हैं. मिनिएचर आर्ट में बारीकी और धैर्य की जरूरत होती है. एक छोटे स्ट्रक्चर को पूरा करने में तीन से चार दिन तक का समय लग जाता है लेकिन बाजार में इसकी कीमत भी उतनी ही अच्छी मिलती है. यही कारण है कि यह हुनर आज उनकी नियमित आय का जरिया बन चुका है.

इंटरनेट से मिली सीख
खुशबू ने आगे कहा कि वह पिछले 10 साल से इस काम में जुटी हुई हैं. उन्होंने जो कुछ भी सीखा, वह इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए ही सीखा. एमबीए और पीजीडीसीए जैसी पढ़ाई करने के बावजूद उनका असली हुनर इसी आर्ट में काम आया. मोबाइल फोन ही उनका सबसे बड़ा शिक्षक बना और उन्होंने ऑनलाइन वीडियो देखकर तकनीकों को अपनाया. हर सफलता के पीछे परिवार का सहयोग अहम भूमिका निभाता है. खुशबू के माता-पिता ने शुरू से ही उनके आर्ट के शौक को बढ़ावा दिया. शादी के बाद भी ससुराल वालों और पति का पूरा सपोर्ट मिला, जिससे वह बिना किसी रुकावट के अपने काम को आगे बढ़ा सकीं.

महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा
खुशबू का कहना है कि यह ऐसा काम है, जिसे महिलाएं घर बैठे अपने फ्री टाइम में भी कर सकती हैं. इसमें समय की कोई पाबंदी नहीं है और मेहनत के हिसाब से आमदनी भी अच्छी हो जाती है. आज उनके बनाए प्रोडक्ट्स न सिर्फ भारत के अलग-अलग राज्यों में बल्कि विदेशों में भी सेल हो रहे हैं. घर की मिट्टी से मिनिएचर आर्ट बनाकर खुशबू ताम्रकार ने यह साबित कर दिया कि हुनर अगर सही दिशा में लगाया जाए, तो वह आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकता है. उनकी कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ अलग और बड़ा करने का सपना देखते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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