मूंगफली की खेती की खास विधि और किस्में, कम पानी में होगा बंपर उत्पादन

मूंगफली की खेती की खास विधि और किस्में, कम पानी में होगा बंपर उत्पादन


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Khargone News: जायद में मूंगफली की खेती करने वाले किसानों को किस्म चयन पर खास ध्यान देना चाहिए. कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि किसानों को हमेशा उन्नत और प्रमाणित किस्मों का ही चयन करना चाहिए.

खरगोन. वैसे तो मूंगफली को मुख्य रूप से खरीफ की फसल माना जाता है लेकिन बदलते कृषि पैटर्न और आधुनिक तकनीकों के चलते अब किसान जायद सीजन में भी मूंगफली की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी का महीना जायद मूंगफली की बुआई के लिए काफी अनुकूल रहता है. सही किस्मों का चयन और खेती की उन्नत विधि अपनाकर किसान कम पानी में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि जनवरी के इस समय में किसान अपने खाली पड़े खेतों में जायद की फसल के रूप में मूंगफली लगाकर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते है. खरगोन जिले की मिट्टी मूंगफली की खेती के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है. पहले यहां बड़े पैमाने पर मूंगफली की खेती होती थी लेकिन समय के साथ इसका रकबा कम हुआ है. अब दोबारा किसान अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.

डॉ सिंह के अनुसार, मूंगफली मूल रूप से खरीफ की फसल है लेकिन जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा है, वे जनवरी और फरवरी महीने में जायद के रूप में इसकी बुआई कर सकते हैं. जायद मूंगफली की खास बात यह है कि इसमें पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है.

मूंगफली की उन्नत किस्में
जायद में मूंगफली की खेती करने वाले किसानों को किस्म चयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि किसानों को हमेशा उन्नत और प्रमाणित किस्मों का ही चयन करना चाहिए. जायद के लिए TG 51 मलिक्का, ALG 06320 और फूले भारती जैसी किस्में काफी उपयुक्त मानी जाती हैं. इसके अलावा अनुसंधान केंद्र से विकसित JGN 3 किस्म भी एक पुरानी लेकिन भरोसेमंद किस्म है, जो आज भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम है. इन किस्मों की खासियत यह है कि ये कम समय में तैयार होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होती है.

खेती की सही विधि
डॉ सिंह आगे बताते हैं कि मूंगफली की बुआई वैसे तो समतल खेत में भी की जा सकती है लेकिन मेड़ बनाकर बुआई करना ज्यादा लाभकारी रहता है. मेड़ विधि से खेती करने पर जल निकास बेहतर रहता है और पौधों का विकास भी अच्छा होता है. यदि किसान ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाते हैं, तो उत्पादन और भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि मेड़ बनाकर उसके दोनों ओर दो लाइन में मूंगफली की बुआई करें और बीच में ड्रिप लाइन बिछा दें. इस तकनीक से कम पानी में ही फसल को पर्याप्त नमी मिलती है और पानी की बचत भी होती है. वहीं जिन किसानों के पास ड्रिप फर्टिगेशन की सुविधा है, वे घुलनशील उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं. फर्टिगेशन के माध्यम से दिए गए पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं, जिससे फसल को अधिक लाभ मिलता है.

कुल मिलाकर जनवरी के महीने में जायद मूंगफली की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बन सकती है. सही किस्म, उचित तकनीक और संतुलित सिंचाई अपनाकर किसान कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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