Last Updated:
Waste Decmoposer for Land: खेती में लगातार घटती उपज और महंगे उर्वरकों से परेशान किसानों के लिए वेस्ट डिकंपोजर एक नया भरोसा बनकर उभरा है. सिर्फ कुछ मिलीलीटर कल्चर से तैयार यह देसी जैविक घोल मिट्टी की संरचना सुधारता है, नमी बनाए रखता है और कम खर्च में बेहतर उत्पादन का रास्ता खोलता है.
शिवांक द्विवेदी, सतना: खेती में बढ़ती लागत और रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता ने किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ाई हैं. ऐसे समय में एक बेहद सस्ता, देसी और असरदार समाधान किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. महज 15 से 50 एमल के छोटे से वेस्ट डिकंपोजर कल्चर से खेतों की मिट्टी को दोबारा जिंदा किया जा सकता है. विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों का दावा है कि इस जैविक तकनीक से मिट्टी की सेहत सुधरती है, फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और उत्पादन में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिलती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह तरीका रसायन मुक्त है और लंबे समय में खेती की लागत को भी कम करता है.
मिट्टी की बढ़ती है पाचन शक्ति
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वेस्ट डिकंपोजर एक तरह का जैविक घोल है जिसमें लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु होते हैं. ये जीवाणु मिट्टी में पहुंचकर जैविक पदार्थों को तेजी से विघटित करते हैं जिससे मिट्टी की पाचन शक्ति बढ़ती है. इससे खेतों में मौजूद पोषक तत्व पौधों को आसानी से मिल पाते हैं. यही वजह है कि इस देसी घोल को आज मिट्टी का मित्र कहा जा रहा है.
लोकल 18 से बातचीत में किसान अंशुमान सिंह बताते हैं कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार वेस्ट डिकंपोजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका कहना है कि शुरुआत में वे भी रासायनिक खादों पर पूरी तरह निर्भर थे लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी की ताकत कम होती जा रही थी. वेस्ट डिकंपोजर के इस्तेमाल के बाद खेतों की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. मिट्टी भुरभरी हुई, नमी बनी रही और फसलों की जड़ें पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गईं.
बेहद आसान है इसे तैयार करना
इस देसी घोल को तैयार करने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है. किसान को बाजार या ऑनलाइन माध्यम से 50 ml का वेस्ट डिकंपोजर कल्चर लेना होता है जिसकी कीमत करीब 300 रुपये होती है. यह एक तरह से वन टाइम इन्वेस्टमेंट माना जाता है. इसके बाद 200 लीटर के ड्रम में करीब 100 लीटर पानी भरकर उसमें पूरा कल्चर मिला दिया जाता है. उसके बाद इसमें थोड़ा गुड़ भी डालना होता है जिससे बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय होते हैं. इस मिश्रण को सुबह, दोपहर और शाम दिन में तीन बार अच्छे से हिलाना या मिलाना जरूरी होता है.
एक ड्रम एक एकड़ के लिए काफी
मौसम के अनुसार इस घोल के तैयार होने में समय लगता है. सर्दियों में यह मिश्रण लगभग 10 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाता है जबकि गर्मियों में 3 से 4 दिनों में ही यह मल्टीप्लाई होकर उपयोग के लायक बन जाता है. एक बार तैयार होने पर 200 लीटर का यह घोल एक एकड खेत के लिए पर्याप्त होता है. किसान इसे सिंचाई के समय नालियों के माध्यम से खेतों में डाल सकते हैं. कई किसान ड्रम के नीचे नल लगाकर इसे धीरे-धीरे पानी के साथ खेत में छोड़ देते हैं जिससे घोल पूरे खेत में समान रूप से फैल जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महीने में 2-3 बार सिंचाई होती है तो उसी के साथ वेस्ट डिकंपोजर का उपयोग करना चाहिए. इससे 5-6 महीनों में मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है और जमीन की उर्वरता लौट आती है. लंबे समय में इससे रासायनिक खादों की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है और खेती ज्यादा लाभकारी बनती है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें