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देश का सबसे साफ शहर कहलाने वाला इंदौर आज सवालों के घेरे में है. भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. जांच में पता चला है कि सीवरेज और नर्मदा पाइपलाइन की लीकेज के कारण गंदा पानी घरों तक पहुंचा. सवाल ये है कि क्या सिर्फ अफसरों को सस्पेंड कर देने से सबकुछ सही हो जाएगा?
Indore water Contamination: देश का सबसे साफ शहर कौनसा है? इंदौर. जी हां, इसे लगातार 8 बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिल चुका है, लेकिन क्या आप मानेंगे कि यहां पीने के लिए ही साफ पानी नहीं हैं. लोग जहरीला पानी पीने से मर रहे हैं, कई अपनी जिंदगी के लिए अस्पताल में लड़ रहे हैं. अब सवाल उठता है कि इसका जिम्मेदार कौन है?
देश में कुछ भी हादसा हो जाए तो सबसे पहले कार्रवाई होती है सस्पेंशन की. क्या अफसरों को सस्पेंड करने से सब कुछ सही हो जाएगा? क्या उन लोगों को न्याय मिलेगा जिनकी जान सिर्फ पानी पीने से चली गई. जिस जगह ये घटना घटित हुई उस इलाके के लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा हुआ क्यों.
क्या है मामला?
भागीरथपुरा की संकरी गलियों में 25 दिसंबर को एक-एक कर लोगों की बीमार पड़ने की खबरें आने लगीं. इसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल खे. नल का पानी पीते ही पेट दर्द शुरू हो गया, फिर उल्टी और दस्त. अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई. ओआरएस और दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी और कई मरीजों को भर्ती करना पड़ा. देखते ही देखते संख्या बढ़ गई. जब हालात नहीं सुधरे तो बीमारों को अस्पताल में भर्ती किया गया. मामला तब उजागर हुआ जब एक साथ 50 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. बताया जा रहा है कि 1 हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए, 149 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती और अब तक 8 बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है.
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