मकर संक्रांति पर्व नजदीक, सोन नदी अब भी मैली! श्रद्धालुओं के स्नान से पहले लोगों ने खोली स्वच्छता की पोल

मकर संक्रांति पर्व नजदीक, सोन नदी अब भी मैली! श्रद्धालुओं के स्नान से पहले लोगों ने खोली स्वच्छता की पोल


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Makar Sankranti Ground Report: मकर संक्रांति पर्व नजदीक आते ही सीधी जिले की सोन नदी की स्थिति चिंता बढ़ा रही है. गऊघाट पर लगने वाले भव्य मेले में लाखों श्रद्धालु स्नान को पहुंचते हैं, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी नदी का पानी मैला है. प्रशासन की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

Sidhi Ground Report: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मकर संक्रांति मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन भले ही सक्रियता के दावे कर रहा हो, लेकिन सोन नदी के गऊघाट की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान गऊघाट क्षेत्र में सोन नदी की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई है. नदी में आसपास के गांवों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी सीधे मिल रहा है, जिससे नदी का पानी मैला हो चुका है. पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली हुई है.

लोकल 18 की टीम गऊघाट पहुंच कर देखा कि सोन नदी पर कचरा तैर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बनी हुई है. कई बार प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, लेकिन निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है. सफाई के नाम पर कागजी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता. मकर संक्रांति के दौरान गऊघाट में सीधी जिले का सबसे बड़ा मेला लगता है. इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु सोन नदी में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. पौष पूर्णिमा से शुरू होकर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि तक स्नान पर्व चलते हैं. ऐसे में प्रदूषित नदी का पानी श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के चुरहट विधानसभा प्रभारी जयराम सिंह चौहान ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं को गंदे पानी में स्नान करना पड़ता है. सोन नदी में कई अवैध नाले मिलते हैं, जिनका पानी बिना किसी रोक-टोक के नदी में गिरता है. उन्होंने आरोप लगाया कि गऊघाट में न तो पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था है और न ही महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा. प्यास लगने पर श्रद्धालुओं को पानी खरीदना पड़ता है या फिर दो किलोमीटर दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है.

स्थानीय निवासी संजय सिंह चौहान ने बताया कि मेला प्रांगण में अव्यवस्थाओं का अंबार है. गंदा पानी पीने से कई बार लोग बीमार भी हो चुके हैं. मेला प्रशासन की देखरेख में लगता है, दुकानदारों से किराया भी वसूला जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता. लगभग डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मकर संक्रांति के दिन यहां पहुंचते हैं. मोहम्मद सलीम ने बताया कि गऊघाट सोन नदी का धार्मिक महत्व गंगा के समान माना जाता है विंध्य क्षेत्र के लोग गंगा स्नान न कर पाने की स्थिति में यहां स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं. बावजूद इसके, बाणसागर डैम से पानी छोड़े जाने के बाद भी नदी की गंदगी दूर नहीं हो पाती.

अब मकर संक्रांति नजदीक है और प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा बन चुकी है. बड़ा सवाल यह है कि क्या समय रहते सोन नदी की सफाई और श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, या फिर इस बार भी आस्था के इस महापर्व पर श्रद्धालुओं को मैली सोन नदी में स्नान करने को मजबूर होना पड़ेगा.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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