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Indore Poisoned Water Tragedy: इंदौर में दूषित पानी से 13 मौतों ने सबसे साफ शहर के दावों की पोल खोल दी है. बाहर से चमक दमक और अंदर से 40 साल पुरानी पाइपलाइन. 1700 करोड़ के प्रोजेक्ट और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं. 1000 से ज्यादा लोग बीमार हैं.
भोपाल. दूषित पानी से हुई कई मौतों ने साल 2017 से लगातार आठ बार भारत के सबसे साफ शहर का ख़िताब जीत रहे इंदौर की पोल खोल दी है. दरअसल, बाहर से शहर साफ बना दिया लेकिन अंदर से पीने के पानी की लाईन फूट चुकीं थीं. न्यूज 18 इंडिया के पास बीजेपी शासित इंदौर नगर निगम के बीजेपी पार्षद की मुख्यमंत्री को लिखी चिट्टी है जिसमें भागीरथपुरा (जहां घटना हुई ) क्षेत्र में चालीस साल पुरानी जर्जर हो चुकी पेयजल पाइपलाइन बदलने के काम में प्रशासनिक लापरवाही के लिये ज़िम्मेदार अफ़सरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है.
क्षेत्र में गंदे पानी की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी. हैरानी की बात ये है कि एक साल पहले पेयजल पाइपलाइन बदलने की फाइल तैयार हो गई फिर उसे सात महीने तक बेवजह लटकाया गया. बीते साल जुलाई में टेंडर जारी हो गया लेकिन टेंडर प्रक्रिया को नियत समय में पूरा नहीं किया गया. अमृत 2 योजना में भी इंदौर में पानी से जुड़े कामों के लिये करीब 1700 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट साल 2023-24 में स्वीकृत हुये लेकिन कछुये की रफ़्तार से सारी प्रक्रिया चलती रही. नतीजा सबसे साफ शहर इंदौर देश में दूषित पेयजल की राजधानी बन गया.
1700 करोड़ जारी हुये थे
कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश नायक ने कहा कि पेयजल योजना के विभिन्न स्तरों के लिये इंदौर में 1700 करोड़ जारी हुये थे. जहां ये घटना हुई वहां छह महीने पहले वर्क ऑर्डर भी इशू हो गये, लेकिन छह महीने तक 40000 लोग गटर का पानी पीते रहे और छह महीने तक उन्होंने पाइपलाइन ठीक नहीं की. आज ये हालत है कि 1000 से ज्यादा लोग बीमार हैं. कई अस्पताल में भर्ती हैं. 13 लोग मर गये. सवाल है कि मंत्री, मेयर, कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर किसी की कोई ज़िम्मेदारी है की नहीं. इनपर कोई कार्रवाही होगी या नहीं.
मुद्दा विपक्ष ने भी उठाया बीजेपी के पार्षद ने भी उठाया, लेकिन असली बात ये है कि 400 करोड़ तो अभी भी पड़े हैं, जो इस्तेमाल ही नहीं हुये. इंदौर नहर निगम के कमिश्नर को निलंबित किया जाये और इंदौर के मेयर और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जो घंटा घंटा कर रहे हैं के पद से हटाया जाये.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें